Swami Vivekananda Birthday: स्वामी विवेकानंद आध्यात्मिक गुरु होने के साथ राष्ट्र भक्त और कुशल वक्ता भी थे। इन्होंने दुनिया में भारत को अलग पहचान दिलाई। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद की स्पीच (Swami Vivekananda Speech) ने दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल दिया था। आज 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती (Swami Vivekananda Birthday) पर हम शिकागो विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद स्पीच की प्रमुख बातें बता रहे हैं, जिसने यूरोपीयन की नजर में सपेरों के देश से भारत दुनिया की प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत वाला देश बन गया।
विश्व धर्म सम्मेलनः शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन (world conference of religions in chicago) में स्वामी विवेकानंद का भाषण ऐतिहासिक था, वह ऐसा भाषण था जिसकी दूसरी मिसाल अभी तक आ नहीं पाई है। स्वामी विवेकानंद ने अपनी स्पीच की शुरुआत मेरी अमेरिकी भाइयों और बहनों शब्द से की थी, इसके बाद ज्ञान, तर्क, उपदेश की जो बात उन्होंने कही, श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए और उनकी स्पीच सुनकर कॉन्फ्रेंस हॉल कई मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भाषण की प्रमुख बातें (Swami Vivekananda Speech Chicago)
1. स्वामी विवेकानंद ने कहा कि मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों, मैं सभी धर्मों की जननी और दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा की ओर से आपको धन्यवाद देता हूं और सभी जातियों, संप्रदायों के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की ओर से आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं यह बताने वालों को भी धन्यवाद देता हूं कि दुनिया में पूरब ने सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ दुनिया को पढ़ाया।
2. मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों को शरण दी है। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं जिसने पूरी दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का ज्ञान दिया। हम विश्व के सभी धर्मों को बराबर सम्मान देते हैं। हमने अपने दिल में इजराइल की पवित्र यादें संजोकर रखी हैं, जब रोमन हमलावरों ने उनके धार्मिक स्थलों का विध्वंस कर दिया तो उन्होंने दक्षिण भारत में आकर शरण ली। हम सताए हुए लोगों को शरण देते हैं।
3. स्वामीजी ने कहा कि जिस तरह नदियां अलग-अलग निकलती हैं और अपनी यात्रा करते हुए आखिरकार समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, उसी तरह इंसान भी अपनी मर्जी से रास्ता चुनता है। रास्ता देखने में अलग हो सकता है पर अंत में वह एक ईश्वर में जाकर मिल जाता है।
4. स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में कहा कि सांप्रदायिकाएं, कट्टरपंथ और हठधर्मिता लंबे समय से लोगों को अपने शिकंजे में लिए हुए हैं। इसी वजह से हिंसा होती है। ये राक्षस न होते तो आज समाज ज्यादा उन्नत और विकसित होता। अब इन राक्षसों का समय खत्म हो चुका है। मुझे उम्मीद है कि सम्मेलन का नाद कट्टरता, हठधर्मिता और दुखों का नाश करेगा। यह चाहे तलवार से संभव हो या कलम की धार से।