रमजान के महीने में रोजों का लाभ और प्रतिफल इंसान को
मरने के बाद तो मिलेगा ही, इस दुनिया में भी रोजा इंसान के लिए लाभदायक है। रोजा
रखने से हमदर्दी, नरमी और मोहब्बत का भाव पैदा होता है। ऎसा इंसान जो कभी
भूखा-प्यासा नहीं रहा हो, उसे क्या पता कि हजारों भूखे-प्यासे किस प्रकार जीवन
बिताते हैं। लेकिन यही जब रोजा रखता है और उसे भूख-प्यास सताती है तो उसे अनुभव
होता है कि उस जैसे बहुत से इंसान कैसे भूखे-प्यासे रहते हैं। फिर उसके ह्वदय में
हमदर्दी, नरमी का भाव जागता है। यही इस्लाम की शिक्षा है।