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रविवार: ये रहेगा रोजा इफ्तार व सहरी का वक्त

रमजान के महीने में रोजों का लाभ और प्रतिफल इंसान को मरने के बाद तो मिलेगा ही, इस दुनिया में भी रोजा इंसान के लिए लाभदायक है

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Sunil Sharma

Jun 28, 2015

roja namaz muslim festival ramjan ramadan

roja namaz muslim festival ramjan ramadan

रोजा इफ्तार व सहरी का
वक्त


मुफ्ती अहमद हसन साहब: इफ्तार - रविवार: 7.25, सहरी - सोमवार:
4.03

दारूल-उल रजविया: इफ्तार - रविवार: 7.29, सहरी - सोमवार: 3.57

शिया
इस्ना अशरी मस्लक: इफ्तार - रविवार: 7.36, सहरी - सोमवार:
3.43


मुफ्ती-ए-शहर

रमजान के महीने में रोजों का लाभ और प्रतिफल इंसान को
मरने के बाद तो मिलेगा ही, इस दुनिया में भी रोजा इंसान के लिए लाभदायक है। रोजा
रखने से हमदर्दी, नरमी और मोहब्बत का भाव पैदा होता है। ऎसा इंसान जो कभी
भूखा-प्यासा नहीं रहा हो, उसे क्या पता कि हजारों भूखे-प्यासे किस प्रकार जीवन
बिताते हैं। लेकिन यही जब रोजा रखता है और उसे भूख-प्यास सताती है तो उसे अनुभव
होता है कि उस जैसे बहुत से इंसान कैसे भूखे-प्यासे रहते हैं। फिर उसके ह्वदय में
हमदर्दी, नरमी का भाव जागता है। यही इस्लाम की शिक्षा है।


- मुफ्ती हकीम
अहमद हसन

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