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Holi 2020: जानिए कब है होली 2020, होलिका पूजन व हाेलिका दहन का शुभ मुहूर्त, क्या है धुलंडी व होलाष्टक ?

- होली ( Holi 2020 ) का पर्व ( When is Holi Festival in 2020 ) इस बार भी बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा - होलिका दहन ( When is Holika Dahan in 2020 ) को आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है - हाेलिका दहन के अगले दिन धुलंडी ( Dhulandi 2020 ) का पर्व मनाया जाता है - होलाष्टक ( Holashtak 2020 ) में कोई भी मंगल कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है

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जानिए कब है हाेली 2020

When is Holi 2020

फाल्गुन माह में मस्ती के बीच होली का पर्व ( Holi Festival 2020 ) इस बार भी बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। भारतीय त्योहारों में होली ( holi festival in india ) भी एक बड़ा त्योहार माना जाता है। इसे रंगों का त्योहार ( festival of colours ) भी कहा जाता हैं। लोग इसे बड़े ही उत्साह व उमंग के साथ मनाते है। होली का त्योहार भी बुराई पर अच्छाई की जीत काे दर्शाता है। दो दिवसीय इस त्योहार में पहले दिन होलिका दहन ( holika dahan 2020 ) किया जाता है। वहीं, दूसरे दिन रंग-गुलाल से होली मनाई जाती है। इस दिन बच्चों से लेकर युवाओं में मस्ती छाई रहती हैं। चलिए जानते है, इस बार कौनसी तारीख को होली मनाई जाएगी। इस बार क्या रहेगा होलिका पूजन, हाेलिका दहन का शुभ मुहूर्त और कब होगी रंगों की बरसात।

होली 2020 कब है ? ( When is Holi 2020 ? )

रंगों के त्योहार होली के नजदीक आते ही बाजार गुलजार हो चुके है। बच्चों के लिए रंगबिरंगी पिचकारियों और बड़ों के लिए लाल, गुलाबी, हरे आदि रंगों से बाजार अटा हुआ है। इस बार होली 9 मार्च यानी सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन शुभ मुहूर्त पर होलिका दहन किया जाएगा। होली के दिन सुबह से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती है।

होलिका दहन 2020 का शुभ मुहूर्त ( Holika Dahan Shubh Muhurat 2020 )

भारतीय इतिहास के मुताबिक होली के त्योहार का बड़ा महत्व है। कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त पर किए जाने पर उसका परिणाम उत्तम फल प्रदान करने वाला हाेता है। इस बार होली का पर्व 9 मार्च यानी साेमवार को मनाया जाएगा। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि इस बार सोमवार शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 52 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा। इससे पहले दोपहर 1 बजकर 15 मिनट के बाद होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी समय बड़कुलों की माला पोही जानी चाहिए। होलिका दहन वाली रात को आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है। मान्यता है कि होलिका दहन की रात पूजा-पाठ करने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है।

कब है धुलंडी 2020 ? ( When is Dhulandi 2020 ? )

हाेलिका दहन के अगले दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग रंग-गुलाल से होली खेलते है। धुलंडी पर डीजे की धुन के बीच नाचते-गाते लोग अलग-अलग प्रकार के रंगों से होली खेलते है, एक-दूसरे पर पानी फेंकते है। ढोल बजा कर होली के गीत गाते है साथ ही घर-घर जाकर अपने दोस्तों और परिवारों आदि को भी रंग लगाया जाता है। इस बार 9 मार्च को होलिका दहन के अगले दिन यानी 10 मार्च को धुलंडी खेली जाएगी।

क्या होता है होलाष्टक ? ( What is Holashtak in 2020 ? )

होली से पहले मंगलवार 3 मार्च को फाल्गुनी शुक्ल पक्ष से होलाष्टक प्रारंभ हो जाएगा, जो 9 मार्च होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। इन आठ दिनों तक होलाष्टक दोष रहेगा, जिसमें कोई भी मंगल कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है। होलाष्टक के पहले दिन फाल्गुनी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप होने के कारण मानव मस्तिष्क तमाम, विकारों, शंकाओं और दुविधाओं से घिरा रहता है। ऐसे में शुभ काम बिगड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में आपको विवाह, नए निर्माण कार्य शुरू नहीं करने चाहिए।

होली क्यों मनाई जाती है ? ( Why Holi is Celebrated ? )

पौराणिक कथाओं के मुताबिक होली का पर्व हिरण्यकश्यप से जुड़ा हुआ है। हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे। लेकिन, उनके पिता इस भक्ती से खुश नहीं थे। हिरण्यकश्यप कई प्रयास के बाद भी प्रह्लाद भगवान ने विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। अंत में हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद भगवान को मारने के लिए योजना बनाई। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन की गोद में प्रह्लाद को बैठाकर अग्नि के हवाले कर दिया। इसमें होलिका जलकर भस्म हो गई, लेकिन भक्त प्रह्लाद को आंच तक नहीं आई । इसके बाद होली मनाने की परंपरा शुरू हुई ।