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सरकार को बड़ा झटका, पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचा FDI

रुपए में लगातार गिरावट के बाद सरकार को बड़ा झटका लगाने जा रहा है । सरकार ने देश में बिजनेस शुरू करने को के नियमों में बदलाव कर बिजनेस को आसान बनाने की कोशिशे तो बहुत की लेकिन यहां भी सरकार के हाथों में नकामी ही हाथ लगी।

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सरकार को बड़ा झटका, पांच साल के निचले स्थर पर पहुंचा FDI

नई दिल्ली । रुपए में लगातार गिरावट के बाद सरकार को बड़ा झटका लगाने जा रहा है। सरकार ने देश में बिजनेस शुरू करने को के नियमों में बदलाव कर बिजनेस को आसान बनाने की कोशिशे तो बहुत की लेकिन यहां भी सरकार के हाथों में नकामी ही हाथ लगी। नियमों के आसान कर देने के बावजूद भी सरकार विदेशी निवेशकों को लुभाने में असफल रही। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की विकास दर पिछले पांच सालोे के सबसे निचले स्तर पर आ गई है।

हर साल गिरते एफडीआइ के आंकड़े

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 2017-18 में एफडीआइ की बढ़ोतरी महज तीन फिसदी के साथ 4,485 डॉलर रही है। जबकी एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय निवेशकों का विदेशों में किया गया निवेश तकरीबन दोगुने से भी ज्यादा है। साल 2016-17 में एफडीआइ की विकास दर 8.67 फीसद रही थी। वहीं, साल 2013-14 में एफडीआइ विकास दर आठ फिसद, साल 2014-15 में 27 फिसद और 2015-16 में 29 फिसद रही थी। हालांकि वर्ष 2012-13 में देश में एफडीआइ की तकरीबन 38 फिसद गिर गया था।

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट

व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्मेलन की रिपोर्ट से भी यह बात जाहिर होती है कि 2017 में भारत में एफडीआइ घटकर 40 अरब डॉलर रहा है जो 2016 में 44 अरब डॉलर था। जबकि विदेशी निवेश की निकासी दोगुने से ज्यादा बढ़कर 11 अरब डॉलर रहा है।

एफडीआइ नियमोें में सुधार की जरूरत

हर साल गिरते एफडीआइ पर विशेषज्ञों का कहना है की अगर एफडीआइ मे बढ़ोतरी करनी है और विदेशी निवेशकों को लुभाना है तो कारोबार करने की सहूलियत में और सुधार किए जाने की जरूरत है ।हर दिन सरकार की नकामी किसी न किसी रूप में सामने आती ही जा रही। पहले रुपए का पांच साल के अंतर में सबसे नीचे आना अब एफडीआई का भी वहीं हाल हर बात के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वाली सरकार इसके लिये किसको जिम्मेदार ठहरायेगी । मोदी सरकार की नाकाम होती नीतियां कही न कही ये सोचने पर मजबूर कर देती है की कांग्रेस की सरकार इससे बेहतर थी ।