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नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक अपने लोन देने के तरीके को बदलने जा रहा है तो अगर आप भविष्य में एसबीआई से लोन लेने का विचार बना रहे हैं। तो यह खबर आपके लिए काफी जरूरी है।दरअसल, एसबीआई ने लोन की ब्याज दर तय करने का तरीका बदल दिया है। 1 अक्टूबर से हाउसिंग और रिटेल लोन के लिए कंपनी ने एक एक्सटर्नल बेंचमार्क बनाया है, जिसके तहत ही अब बैंक लोन देना।
1 अक्टूबर से होगा बदलाव
बैंक ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि वह 1 अक्टूबर से अपने सभी तरह के लोन को रेपो रेट से जोड़ेगा। फिलहाल एसबीआई ने ये फैसला RBI की ओर से जारी किए गए निर्देश को ध्यान में रखते हुए दिया है। आरबीआई ने 4 सितंबर को इस संबध में नोटिफिकेशन जारी किया था। वहीं, इससे पहले एसबीआई ने रेपो रेट को होम लोन से लिंक होम लोन प्रोडक्ट को भी वापस लिया था।
SBI ने जारी किया नोटिफिकेशन
एसबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सभी परिवर्तनीय ब्याज दर वाले ऋणों के लिए हमने ब्याज दर का बाहरी मानक रेपो दर को अपनाने का निर्णय किया है। लघु एवं उद्योग लोन, आवास ऋण और अन्य खुदरा ऋणों पर यह ब्याज दरें एक अक्टूबर 2019 से प्रभावी होंगी। रिजर्व बैंक ने बैंकों को रेपो दर, तिमाही या छमाही राजकोषीय बिल या फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी किए गए किसी भी बाजार ब्याज दर मानक में से एक को चुनने का विकल्प दिया था।
रेपो रेट का मिलेगा फायदा
बैंक ने कहा कि हमारे इस कदम से देश के ग्राहकों को रेपो रेट का फायदा भी मिल सकेगा बता दें कि 1 अप्रैल 2016 के बाद से कोई भी बैंक MCLR से कम ब्याज दर पर कर्ज नहीं दे सकता है। SBI ने RLLR 7.65 फीसदी तय किया था, जो 1 सितंबर 2019 से प्रभाव में आया था।
RBI ने दिए कई विकल्प
रिजर्व बैंक ने बैंकों को यह विकल्प भी दिया था कि वे फ्लोटिंग लोन दरों को रेपो रेट या तीन माह व छह माह के ट्रेजरी बिल या फाइनेंशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (FBIL) द्वारा प्रकाशित किसी भी बेंचमार्क दर के आधार पर रखें।
Updated on:
23 Sept 2019 04:03 pm
Published on:
23 Sept 2019 03:53 pm
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