17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, यह बात जेल की चाहरदीवारी में बंद कैदियों ने साबित कर दिखाई, यकीन न हो तो देख लीजिए ये वीडियो

— जिला जेल में बंद बंदियों ने इग्नू के तहत दी परीक्षा, 15 महिला बंदियों सहित करीब 250 ने दी परीक्षा।

2 min read
Google source verification
exam

exam

फिरोजाबाद। जेल में बंद बंदियों की अपनी कुछ ख्वाइश भी होती है लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए उनके पास आजादी नहीं होती। यही कारण होता है कि जेल में बंदियों का भविष्य उसी चारदीवारी तक ही सिमट कर रह जाता है। जेल अधीक्षक के प्रयासों ने जेल के अंदर एक अलग माहौल बना दिया है। जेल में निरुद्ध बंदी अब अपराध की नहीं बल्कि शिक्षित होने के बारे में सोचने लगे हैं।

यह भी पढ़ें—

नौसेना में तैनात फिरोजाबाद के युवक की पत्नी ने गोवा में पीट—पीटकर कर दी हत्या, वजह जानकर हैरान जाएंगे आप

इग्नू के तहत दी परीक्षा
फिरोजाबाद जेल में बन्दी सुधार पर तमाम काम किये जा रहे हैं जिसके चलते जेल की चार दीवारी के अन्दर रहते हुए करीब ढाई सौ बन्दी इग्नू के तहत परीक्षा दे रहे हैं जिनमें पन्द्रह महिला बन्दी भी शामिल हैं। जेल अधीक्षक एमए खान की कोशिशें बन्दियों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। बन्दियों में कुण्ठा, मानसिक तनाव को खत्म करके अच्छी सोच पैदा करने के लिए खेल कूद, विभिन्न प्रतियोगिताऐं, शिक्षा आदि पर बहुत ही ध्यान दिया जा रहा है जिससे बन्दी जेल से बाहर जाकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ कर समाज, परिवार एवं राष्ट्र के लिए अच्छा काम कर सकें और दुबारा जेल में न आयें।

यह भी पढ़ें—

मायावती का शिवपाल पर बड़ा हमला, अक्षय यादव की हार का जिम्मेदार ठहराया, जानिए क्या कहा!

ये बोले जेलर
मन में लगन और जज़्बा हो तो कोई काम मुश्किल नहीं है, यह फिरोजाबाद जेल के बन्दियों ने कर दिखाया है। जेल के बाहर समाज में रहने वाले स्वतन्त्र लोग इग्नू से परीक्षा आसानी से नहीं दे पाते हैं लेकिन करीब ढाई सौ जेल के बन्दी इग्नू से परीक्षा देकर नाम रोशन कर रहे हैं और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत बन रहे हैं।

यह भी पढ़ें—

VIDEO: सपा—बसपा गठबंधन टूटने का सबसे अधिक असर इस विधानसभा में होने वाले उप चुनाव पर पड़ेगा, ये है बड़ी वजह

सितंबर में बना सेंटर
फिरोजाबाद जेल में पिछले वर्ष माह सितम्बर में इग्नू का सेन्टर बनाया गया और बन्दियों को पुस्तकंे प्रदान कराकर कक्षाऐं लगायी गयीं। कुल 288 बन्दी परीक्षा देने के लिए पंजीकृत किये गये थे जिनमें कुछ बन्दी जेल से रिहा हो गये और 246 बन्दी परीक्षा दे रहे हैं जिनमें 15 महिला बन्दी भी शामिल हैं। पहले दिन 190 बन्दियों ने परीक्षा दी जिनमें नौ महिलाऐं शामिल हैं। इग्नू से भेजे गये आॅब्जर्बर डॉ. एसके उपाध्याय एवं जेल अधीक्षक एमए खान की निगरानी में समस्त औपचारिकताऐं पूर्ण करने के बाद पेपर खोले गये और कड़ी निगरानी में परीक्षा करायी जा रही हैं।