
National pollution control day
हर साल दो दिसंबर को National pollution control day के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देशभर में बढ़ रहे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लोगों को जागरुक करना है, ताकि इसके दुष्प्रभावों से आम जनमानस को बचाया जा सके। इन दिनों smog के कारण प्रदूषण का मुद्दा देशभर में जोर पकड़े हुए है। इसको लेकर भारत सरकार से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। प्रदूषण से निपटने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में डॉ. संजीव वर्मा ने एक ऐसी बात बतायी है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
आरामदायक साधन बढ़ा रहे इनडोर पॉल्यूशन
डॉ. संजीव वर्मा का कहना है कि एक आम आदमी धूल, मिट्टी, धुएं आदि को ही पॉल्यूशन समझता है। ये तो सिर्फ एक तरह का प्रदूषण है। इसे हम वायु प्रदूषण कहते हैं। इसके अलावा हर वो चीज जो अपने नियत पैरामीटर से उपर चली जाती है, उसे प्रदूषण की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे ध्वनि प्रदूषण। एक निश्चित क्षमता तक तो आवाज हमें सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन यदि वो आवश्यकता से अधिक हो तो उसे ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में रखा जाता है। इसी तरह प्रदूषण का एक प्रकार इनडोर प्रदूषण है। जैसे जैसे हमारे आराम के साधन बढ़ रहा है, वैसे वैसे इनडोर पॉल्यूशन हमें घेरता जा रहा है। जो कि हमारे लिए बहुत घातक है।
तमाम मानसिक समस्याओं को पैदा करता है
डॉ. संजीव वर्मा का कहना है कि आजकल घर घर में फ्रिज है। लेकिन आपको शायद ही पता हो कि फ्रिज से निकलने वाली गैस हमारे घर के अंदर रहती है। इस गैस के बीच में रहना हमारे लिए बहुत घातक है। कई बार लोग फ्रिज को अपने कमरे में रख लेते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा एलईडी बल्व, एसी, मोबाइल, यहां तक कि दीवारों के अंदर होने वाली वायरिंग भी रेडिएशन पैदा कर इनडोर पॉल्यूशन फैलाती है। इसके कारण व्यक्ति के अंदर तमाम तरह की परेशानियां पैदा होती हैं, जैसे चिड़चिड़ापन, शॉर्ट टेंपर होना, तनाव, नींद की कमी, डिप्रेशन आदि। इन परेशानियों से आज लगभग हर शख्स जूझ रहा है, लेकिन व्यक्ति को खुद ये पता नहीं होता कि ये परेशानी आखिर उसे कैसे हुई। दरअसल घर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रिक चीजों से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पॉल्यूशन होता है, जोकि शरीर के लिए बहुत घातक होता है। ये सच है कि हमें वायु प्रदूषण से बचने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन इनडोर पॉल्यूशन के प्रति जागरुकता भी बहुत जरूरी है।
घरों के मुकाबले फ्लैट में अधिक होता है इनडोर पॉल्यूशन
जैसे जैसे देश की जनसंख्या बढ़ती जा रही है, वैसे वैसे फ्लैट की संस्कृति भी बढ़ रही है क्योंकि जगह सीमित है। फ्लैट में उतनी खुली जगह नहीं होती जितनी घरों में होती है। हालांकि अब नए फ्लैट्स जो बन रहे हैं, उनमें इस बात का ध्यान रखने की कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा खुली जगह हो। लेकिन फिर भी इनडोर पॉल्यूशन घरों के मुकाबले फ्लैट्स में ज्यादा रहता है क्योंकि एक के उपर एक कई घर बनते हैं, हर फ्लोर पर सर्किट डाले गए होते हैं।
बचाव के लिए ये उपाय आजमाएं
— घर को पूरी तरह बंद न रखें, खिड़की व दरवाजे दिन में खोलें ताकि हवा और धूप घर में आ सके।
— फ्रिज को बेडरूम में रखने के बजाय ऐसे स्थान पर रखें जहां कम रहना होता हो।
— घर के अंदर इनडोर प्लांट लगाएं।
— इलेक्ट्रॉनिक चीजों का सीमित प्रयोग करें।
— फिजूल में एलईडी बल्व आदि न जलाएं।
— घर के बाहर भी गमलों और बगीचे में पेड़ लगाएं ताकि घर के अंदर शुद्ध हवा आ सके।
Published on:
01 Dec 2019 10:00 am

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