
jeewan ki seekh
फिरोजाबाद। एक व्यक्ति ने अपने गुरु से पूछा— मेरे कर्मचारी, मेरी पत्नी, मेरे बच्चे और सभी लोग मतलबी हैं। कोई भी सही नहीं है, क्या करूं। गुरु थोड़ा मुस्कराए और उसे एक कहानी सुनाई। गुरु की कहानी सुनकर उसके अंदर ज्ञान की प्राप्ति हुई। वह समझ गया कि इस जीवन का मूल उद्देश्य क्या है। जीवन एक नाटक है और यहां हर कोई अपना किरदार निभा रहा है। आपको धक्का देकर हर कोई आगे बढ़ने का प्रयत्न कर रहा है।
गुरु ने सुनाई यह कहानी
एक गाँव में एक विशेष कमरा था जिसमें 1000 शीशे लगे थे। एक छोटी लड़की उस कमरे में गई और खेलने लगी। उसने देखा 1000 बच्चे उसके साथ खेल रहे हैं और वो उन प्रतिबिम्ब बच्चों के साथ खुश रहने लगी। जैसे ही वो अपने हाथ से ताली बजाती सभी बच्चे उसके साथ ताली बजाते। उसने सोचा यह दुनियां की सबसे अच्छी जगह है और यहां बार—बार आना चाहिए।
उदास व्यक्ति पहुंच गया
थोड़ी देर बाद उसी जगह पर एक उदास आदमी कहीं से आया। उसने अपने चारों तरफ हजारों दु:ख से भरे चेहरे देखे। वह बहुत दु:खी हुआ। उसने हाथ उठा कर सभी को धक्का लगाकर हटाना चाहा तो उसने देखा हजारों हाथ उसे धक्का मार रहे हैं। उसने कहा यह दुनिया की सबसे खराब जगह है वह यहां दोबारा कभी नहीं आएगा और उसने वो जगह छोड़ दी।
दुनिया एक कमरे के समान
इसी तरह यह दुनिया एक कमरा है जिसमें हजारों शीशे लगे हैं। जो कुछ भी हमारे अंदर भरा होता है वह ही प्रकृति हमें लौटा देती है। अपने मन और दिल को साफ़ रखें तब यह दुनिया आपके लिए स्वर्ग की तरह ही है।
सीख
यदि हम दूसरों को धक्का देकर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे तो आपके पीछे वाला भी आपको धक्का देकर आगे निकलने का प्रयास करेगा।
प्रस्तुतिः विजय बहन
Published on:
15 Dec 2019 09:38 am
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