
यूपी का एक शहर है। जाने क्यों लोग उसे सुहाग नगरी कहते हैं। नाम से लगता है जैसे वहां की हर महिला सुहागिन है। लेकिन इसकी असली कहानी कुछ और है। शहर का नाम है फिरोजाबाद।
असल में शहर का नाम सुहाग नगरी यहां की चूड़ियों के चलते पड़ा है। हां वही, चूड़ियां वाली चूड़ियां। कांच की। पट से टूट जाने वाली चूड़ियां। हर साड़ी रंग से मैच कराके पहनी जाने वाली चूड़ियां। आइए पूरी कहानी सुनाते हैं।
सबसे पहले मेरी एक कहानी है। मैंने फिरोजाबाद का नाम सुना जब में क्लास 12 में थी। इंग्लिश की बुक में एक लेसन था ‘The lost spring’, इसमें फिरोजाबाद में चूड़ी बनाने वाले के स्ट्रगल की कहानी थी। तब से मेरी क्यूरिऑसिटी थी इस शहर को जानने की।
जब पूरा पता किया तो पता चला कि ये सिर्फ चूड़ियों का शहर नहीं है। यहां कांच के कई तरह के सामान बनते हैं। इसकी शुरुआत 100 साल पहले हाजी रुस्तम उस्ताद नाम के शख्स ने की थी। उनकी याद में आज भी मेला लगता है। फिर पता चला कि आखिर ये पूरा काम होता कैसे है।
1200 डिग्री सेल्सियस पर बनती है कांच
चूड़ी बनाने के लिए केमिकल जैसे सिलिका सेंड, सोडा एश और कैल्साइट का मिक्सचर तैयार कर फर्निश भट्ठियों के पॉट में डाला जाता है। चूड़ी के रंग के हिसाब से उसी रंग का केमिकल मिक्सचर में मिलाया जाता है। करीब 12 घंटे तक केमिकल को 1200 डिग्री तापमान पर रखा जाता है। तब जाकर कहीं कांच पिघलकर तैयार होता है।
उसके बाद कारीगर कांच को भट्टी से निकाल कर एक आकार देते हैं। पिघल हुए कांच से कारीगर एक पतली सी तार बनाते है। इस तार को एक लगातार घूमने वाली छड़ पर रखा जाता है जो लगातार मोटर पर घूमती रहती है। रॉड के चारों ओर पिघला हुआ ग्लास एक चूड़ी का आकार ले लेता हैं। फिर चूड़ी के बने रोल को हिरे से काटा जाता है।
काटने के बाद चूड़ियां अलग-अलग हो जाती हैं। इन्हें फिर मिट्टी के तेल के दीपक या एक मोमबत्ती की मदद से जोड़ा जाता है। इसके बाद चूड़ियों को जरी, सिल्वर या गोल्डन पाउडर से सजाया जाता है। ऐसे बनती हैं डिजाइन वाली चूड़ियां।
Published on:
17 Jan 2023 03:27 pm
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