वर्ल्ड कप में इंडिया को जीत दिलाने में अहम रोल निभाने वाली सोनम उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की रहने वाली है।
अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 7 विकेट से मात दी है। 16 साल की सोनम ने भारतीय टीम को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने इस टूर्मामेंट में भारत के लिए छह मैच खेले और चार विकेट लिए।
पिता ने मजदूरी कर सोनम के सपने किए पूरे
सोनम यादव आज एक ऐसा चेहरा बन गई हैं, जिसे पूरा देश सलाम कर रहा है। लोग उनकी कामयाबी की बातें कर रहे हैं। उनके पिता मुकेश कुमार की तारीफें हो रही हैं सोनम के लिए ये सफर हमेशा से आसान नहीं रहा। गरीब परिवार में पली-बढ़ी सोनम यादव के पिता एक कांच की फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं।
कमजोर आर्थिक हालत के बावजूद सोनम के पिता ने उनको क्रिकेटर बनाने की ना सिर्फ ठानी बल्कि ये करके भी दिखा दिया। हालांकि उनके पिता को बहुत कुछ सहना पड़ा। उन्होंने जब सोनम को क्रिकेट खेलने भेजा तो उन्हें बहुत कुछ सुनना पड़ा। एक तरफ पैसों की दिक्कत थी तो दूसरी तरफ रिश्तेदारों और पड़ोसियों के ताने।
पिता की महनत ने बनाया सोनम को क्रिकेटर
क्रिकेटर सोनम यादव की मां गुड्डी देवी ने मीडिया से बात करते हुए बताया। मेरी बेटी जहां है वहां तक पहुंचने के लिए उसने बहुत मेहनत की है। उसको यहां तक पहुंचाने के लिए उसके पिता ने भी दिन-रात काम किया। पिता और बेटी दोनों की मेहनत आज रंग लाई है। मुझे बहुत खुशी है कि मेरी बेटी ने देश के नाम के साथ हमारा भी नाम रौशन किया है।
मुकेश की महीने की सैलरी इतनी अच्छी नहीं है कि वह बेटी को हर वो सुविधा दे सकते जो एक क्रिकेटर को शुरूआती दौर में दी जाती है। फिर भी उन्होने सोनम को कभी ये एहसास नहीं होने दिया की वह मजदूर की बेटी है।
लड़के सोनम के साथ खेलने से डरते थे
फिरोजाबाद के थाना टूंडला की रहने वाली सोनम यादव जब 13 साल की थीं, तभी से उनको क्रिकेट काफी पसंद था। सोनम हमेशा टीवी पर मैच देखा करती थी। सोनम अपने पड़ोस के लड़कों के साथ हमेश मैदान में क्रिकेट खेला करती थी। सोनम को बोलिंग करना अच्छा लगता था। वह जब भी अपने इलाके के लड़कों के साथ खेलती थी। अक्सर अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों को आउट कर देती थीं।
सोनम के साथ हर लड़का मैच खेलने से डरता था। लड़कों को पता होता था की वह सोनम के सामने ज्यादा नहीं टीक पाएंगे और जल्दी आऊट हो जाएंगे। पड़ोस के लोग सोनम की तारीफ करते थे। इसने उनका हौसला और बढ़ा दिया था।
अपने अच्छे प्रदर्शन से बनाई अंडर-19 में जगह
क्रिकेट के लिए सोनम की रुचि को देखकर उनके पिता ने उनका एडमिशन फिरोजाबाद के ही क्रिकेट कोचिंग सेंटर में करवा दिया था। इस दौरान उन्होंने भारतीय अंडर-19 टीम में अपनी जगह बनाई। इसके बाद सोनम को चार दिन की ट्रेनिंग के लिए गोवा भेजा गया। टीम में चयन के बाद उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए विशाखापटनम जाना पड़ा। इन सभी चीजों में सोनम के परिवार ने खासकर उनके पिता ने उनको काफी सपोर्ट किया।
अभी और संघर्ष बाकी है- सोनम
रविवार को भारत के चैंपियन बनने के बाद सोनम के परिवार को दूर-दूर से बधाइयां मिल रही हैं। सोनम का कहना है कि यह तो महज शुरुआत है और उन्हें अभी और मेहनत करके सीनियर टीम में जगह बनानी है। साथ में सोनम ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता के बाद भाई अमन यादव, कोच रवि यादव और विकास पालीवाल को दिया।