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विश्व परिवार दिवस: कोरोना काल में अपनों के साथ खड़ा है यह 40 लोगों का परिवार, कोरोना की नो एंट्री

— इतना बड़ा परिवार होने के बाद भी कोरोना की नहीं होने दी घर में एंट्री, सुरक्षा को लेकर उठाते हैं कड़े कदम।

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World Family Day

बच्चों के साथ बैठे परिवार के पुरुष

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
फिरोजाबाद। कोरोना के चलते कई परिवार बिखर गए। कई परिवारों का चिराग बुझ गया तो कहीं घर चलाने वाला नहीं बचा लेकिन इस कोरोना काल में यह संयुक्त परिवार न केवल रिश्तों की डोर को बांधे हुए है बल्कि कोरोना के लिए नो एंट्री कर रखी है। इस 40 सदस्यों वाले परिवार में सभी अपने—अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
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इस घर में हैं सभी रिश्तों का प्यार
जी हां, हम बात कर रहे हैं थाना पचोखरा फिरोजाबाद क्षेत्र के गांव छिकाऊ की। जहां रहने वाले पूर्व प्रधान विनोद दीक्षित का परिवार रिश्तों की डोर को बांधे हुए हैं। जहां इस संकट की घड़ी में एकल परिवार जिन्हें अपनों की तलाश है वहीं इस परिवार में पिता, ताऊ, चाचा से लेकर ताई और चाची भी अपने फर्ज को अच्छे से निभा रही हैं। पूर्व प्रधान विनोद दीक्षित ने बताया कि पिता की मौत के बाद सभी भाइयों ने अपनी जिम्मेदारी को समझा और परिवार के साथ ही राजनीति में बड़ा योगदान दिया। वह पूर्व प्रधन हैं तो उनका छोटा भाई नीरज दीक्षित साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष हैं।

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नहीं आने दिया कोरोना
वह बताते हैं कोरोना से बचाव किया जाए तो वह घर में प्रवेश नहींं कर सकता। उनके परिवार में भी कोरोना के नियमों का पालन किया जाता है। गाांव का कोई भी व्यक्ति घर में प्रवेश नहीं कर सकता। बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करते हैं। हाथों को सैनिटाइज करते रहते हैं। कोरोना को रोकने में घर की महिलाओं और बच्चों का भी बड़ा योगदान रहा है।
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करते हैं सलाह मशविरा
उन्होंने बताया कि वह नौ भाई हैं। कोई भी काम करने से पहले वह सभी आपस में बैठकर सलाह मशविरा करते हैं। खेती और आलू का व्यापार करते हैं। महिलाएं आपस में सामंजस्य बनाकर घर के कामों को निपटाने का काम करती हैं। उनके परिवार में सबसे बड़े प्रमोद दीक्षित उनसे छोटे मनोज दीक्षित, पवन दीक्षित, विनोद दीक्षित, नीरज दीक्षित, संदीप दीक्षित, रामनरेश दीक्षित, बृजेश दीक्षित और वरूण दीक्षित हैं। इन सभी की पत्नी और दो नाती मिलाकर कुल 40 लोगों का परिवार है।