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FIFA World Cup 2026: क्या फिर भिड़ेंगे अर्जेंटीना और फ्रांस? सेमीफाइनल की जंग ने बढ़ाई फैंस की धड़कनें

FIFA World Cup 2026 Semifinals: फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम और डलास के एटीएंडटी (AT&T) स्टेडियम में होने वाले सेमीफाइनल मुकाबलों में अर्जेंटीना का सामना इंग्लैंड से और फ्रांस की टक्कर स्पेन से होगी। क्या 2022 की तरह इस बार भी अर्जेंटीना-फ्रांस का फाइनल दिखेगा या स्पेन और इंग्लैंड बाजी मारेंगे?
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भारत

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Anshika Verma

Jul 14, 2026

FIFA World Cup 2026 Semifinals , messi vs mbappe

किलियन एम्बापे और लियोनल मेसी (Photo - X/@FIFA)

FIFA World Cup 2026 Semifinals: चार साल पहले (2022) अर्जेंटीना और फ्रांस के बीच हुआ फीफा वर्ल्ड कप का फाइनल मैच फुटबॉल इतिहास के सबसे बेहतरीन मैचों में से एक माना जाता है। उस मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के बाद लियोनल मेसी ने आखिरकार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाई थी, तो दूसरी तरफ फ्रांस के किलियन एम्बापे ने फाइनल में हैट्रिक मारकर इतिहास रच दिया था। अब 2026 वर्ल्ड कप में जब केवल आखिरी चार टीमें बची हैं, तो फुटबॉल प्रेमियों के बीच एक बार फिर उसी फाइनल के दोहराए जाने की चर्चा तेज हो गई है।

पहले से ज्यादा संतुलित अर्जेंटीना

इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। उन्हें नॉकआउट मैचों में आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। अर्जेंटीना ने केप वर्डे और मिस्र (इजिप्ट) जैसी टीमों के खिलाफ कांटे के मुकाबले जीते और फिर क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को हराया। हालांकि मेसी अब भी टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं, लेकिन इस बार अर्जेंटीना की टीम पहले से ज्यादा संतुलित नजर आ रही है। जूलियन अल्वारेज, लाउतारो मार्टिनेज और एंजो फर्नांडीज जैसे खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। कोच लियोनल स्कालोनी की यह टीम अब किसी एक खिलाड़ी के भरोसे नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में ढलने के लिए तैयार दिखती है।

2022 में चैंपियन बनने के बाद इन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है। वे दबाव के समय में भी मैदान पर शांत रहते हैं और अगर पहले हाफ में पिछड़ भी जाएं, तो शानदार वापसी करना जानते हैं।

फाइनल से पहले स्पेन है बड़ी चुनौती

दूसरी तरफ, फ्रांस की टीम हमेशा की तरह टूर्नामेंट के मैचों के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है। कोच डिडिएर डेशचैम्प्स ने एक बार फिर ऐसी टीम तैयार की है जिसमें रफ्तार, बेहतरीन तकनीक और अनुभव का शानदार तालमेल है। किलियन एम्बापे भले ही फ्रांस के सबसे बड़े स्टार हैं, लेकिन अब उनका अटैक केवल एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। ओस्मान डेम्बेले जैसे खिलाड़ियों ने भी आगे बढ़कर जिम्मेदारी ली है, जिससे फ्रांस का अटैक हर तरफ से खतरनाक हो गया है। उनका डिफेंस भी लाजवाब रहा है, जिसने पूरे टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ एक गोल खाया है। लेकिन, सीधे अर्जेंटीना और फ्रांस के फाइनल की उम्मीद करना बाकी दो टीमों की काबिलियत को कम आंकना होगा।

इंग्लैंड का रहा दमदार प्रदर्शन

इंग्लैंड की टीम थॉमस ट्यूशेल की देखरेख में बेहद मजबूत बनकर उभरी है। यह टीम जरूरत पड़ने पर डिफेंसिव खेल खेलकर भी मैच जीतना जानती है और मौका मिलने पर विरोधियों को पस्त करने का दम भी रखती है। हैरी केन के साथ जूड बेलिंगहैम टीम के नए लीडर बनकर उभरे हैं और यह दोनों खिलाड़ी गोल्डन बूट की रेस में भी चौथे पायदान (6-6 गोल के साथ) पर है। पूरी टीम के इस दमदार प्रदर्शन ने इंग्लैंड के फैंस में 1966 के बाद एक बार फिर वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद जगा दी है।

वंडर-किड यमाल के भरोसे स्पेन

वहीं स्पेन की चुनौती भी बेहद कड़ी है। युवाओं के जोश और कमाल की रणनीति के दम पर स्पेन इस टूर्नामेंट की सबसे खतरनाक टीमों में से एक साबित हुई है। जहां सबका ध्यान युवा स्टार लामिन यमाल पर है, वहीं स्पेन का मजबूत डिफेंस उनकी असली ताकत रहा है। उन्होंने गेंद को अपने कब्जे में रखकर मैच को कंट्रोल किया है और विरोधियों के लिए उनके डिफेंस को भेदना नामुमकिन सा रहा है। स्पेन ने भी इस टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है और सेमीफाइनल में वे फ्रांस के अटैक की कड़ी परीक्षा लेंगे।

अर्जेंटीना और फ्रांस के बीच दोबारा फाइनल मैच होने की उम्मीद तो है, लेकिन इसे तय मान लेना जल्दबाजी होगी। इस वर्ल्ड कप ने दिखा दिया है कि टीमों के बीच अंतर बहुत कम है और सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमें ट्रॉफी जीतने की पूरी हकदार हैं।