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विष्णुनगरी गया धाम के श्मशान घाट पर भी कोरोना का भय

भगवान विष्णु के यज्ञ की आहुतियों की तपिश से प्रयाण के पूर्व गयासुर ने भगवान से तीन वर पर्याप्त किए थे (Bihar News) जिनमें (Gaya News)...

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गया

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Prateek Saini

Apr 11, 2020

विष्णुनगरी गया धाम के श्मशान घाट पर भी कोरोना का भय

विष्णुनगरी गया धाम के श्मशान घाट पर भी कोरोना का भय

प्रियरंजन भारती
गया: विष्णुभक्त गयासुर को भगवान विष्णु की ओर से दिए गए वरदानों के लिए विश्वप्रसिद्ध गयाधाम के विष्णुपद मंदिर के निकट श्मशान घाट पर भी कोरोना का भय साफ दिखने लगा है।आम दिनों की तरह यहां शवदाह के लिए रेलमपेल नज़ारा नहीं दिख रहा है। बमुश्किल दो चार लोग ही इक्का दुक्का शव लेकर दाह संस्कार के लिए आ रहे हैं। मानपुर से आए विवेक कुमार सिंह मुंह पर गमछा बांधे चाचा के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे हैं। पूछने पर दूर से ही कहा, कोरोना का भय सभी को सता रहा है। पता नहीं इस दानव का कब अंत हो पाएगा?


गयासुर को मिले थे यह वरदान...

भगवान विष्णु के यज्ञ की आहुतियों की तपिश से प्रयाण के पूर्व गयासुर ने भगवान से तीन वर पर्याप्त किए थे जिनमें प्रतिदिन एक मुंड और एक पिंडदान का वर प्रमुख बताया गया है। विष्णपद मंदिर के पास अवस्थित शमशानाक्षी देवी का मंदिर है जो श्रमदान घाट पर है। यहां आए दिन शवों की अंत्येष्टि की भीड़ रहती नहीं है। वैसे भी अंत: सलिला फल्गु नदी के तट पर अंतिम संस्कार करने से लोग मोक्ष प्राप्ति की मान्यताओं को माथे आ रहे हैं। लिहाजा हर दिन यहां अंतिम संस्कार करने वालों की दूर दराज से बड़ी भीड़ जुटती रही है। लेकिन कोरोना की दहशत के बीच लॉकडाउन में यहां कोई कोई ही स्वजनों के दाह संस्कार के लिए पहुंच रहा है।


श्मशनाक्षी काली के प्रसिद्धस्थल पर इस श्मशान घाट में आम दिनों में सौ के लगभग अंतिम संस्कार होते रहे हैं। विष्णुधाम में अंतिम संस्कार का सनातन धर्म में अपना अलग महत्व भी माना जाता है। पर कोरोना वायरस के दुष्प्रभावों के भय से भारी भीड़ के साथ शवदाह करने वालों की संख्या कम हो गई है। इस कार्य के लिए आने वालों की संख्या भी नगण्य हो गई है। ऐसा नहीं कि मृतकों की संख्या कम हो गई। पर स्वजन ज़रूरी कर्मकांड सुविधानुसार अन्यत्र कर देने पर विवश हो गए हैं। इसमें भी मान्यताओं के अनुरूप बड़ी संख्या में शवयात्रा में शरीक होने वालों में भारी कमी देखी जा रही है। यही हाल गया के कब्रगाह में भी देखा जा रहा है। जनाजे के साथ कम से कम लोग शवों को दफनाने कब्रिस्तान पहुंच रहे हैं।