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सीएम योगी के गाजियाबाद दौरे के बीच किसानों ने वेव सिटी के मेन गेट को घेरा, पुलिस प्रशासन की बढ़ी परेशानी

भारतीय किसान संगठन और किसान संघर्ष समिति के बैनर तले कई गांवों के किसानों ने गाजियाबाद के वेव सिटी के मेन गेट को घेर लिया है। किसानों के धरना प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।

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CM Yogi adityanath in Ghaziabad farmers surrounded the main gate of Wave City

गाजियाबाद के वेव सिटी के मेन गेट को घेरकर बैठे किसान

Ghaziabad News: गाजियाबाद में वेव सिटी बिल्डर के खिलाफ किसानों ने बुधवार को धरना शुरू कर दिया है। किसानों ने वेव सिटी के मेन गेट को घेरकर बंद कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद के रामलीला ग्राउंड पहुंचे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के इस हंगामा से पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए हैं। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है और किसानों को समझकर गेट खोलने की कोशिश की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, गाजियाबादमें वेव सिटी बिल्डर के खिलाफ लंबे समय से डेढ़ दर्जन गांवों के किसान आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन किसानों की समस्याओं का अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है, जिससे नाराज किसान बुधवार को वेव सिटी के गेट पर पहुंच गए और रोड जाम करके धरने पर बैठ गए।

किसानों के धरना प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पहुंची पुलिस

भारतीय किसान संगठन और किसान संघर्ष समिति के बैनर तले कई गांवों के किसानों ने गाजियाबाद के वेव सिटी के मेन गेट को घेर लिया है। किसानों के धरना प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है। पुलिस के आला अधिकारी किसानों को समझाकर गेट से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि बिल्डर ने जो लिखित और मौखिक समझौते किए हैं वो अब से लगभग आठ साल पहले लागू किए जाने थे। लेकिन आज तक उन समझौतों को बिल्डर द्वारा अमल में नहीं लाया गया। सरकार द्वारा बिल्डर को लाइसेंस देकर 20 साल से किसानों को बंधक बना कर रख दिया गया है।

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किसानो ने रखी अपनी मांग

किसानों की जमीनों का उचित मुआवजा तय नहीं किया गया है। प्रभावित किसानों को घोषित आठ प्रतिशत प्लॉट नहीं दिए गए हैं। भूमिहीनों को घोषित फ्लैट या प्लॉट नहीं दिए गए। प्रभावित किसानों के परिवारों को रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिसकी वजह से गांवों का समग्र विकास नहीं हो पा रहा है। समझौते में सभी प्रभावित किसानों को शामिल नहीं किया गया। जब तक किसानों की सभी मांगे पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक ये किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।