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इस नगर पंचायत में अंसारी बंधुओं के खास को मिलती है जीत, जानिए इस सीट पर किसको कब कब मिली जगह

1837 से 2012 तक का आकड़ा, जानिए इस सीट पर किसको कब कब मिली जीत

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Ansari Bandhu

अंसारी बंधु

गाजीपुर. बहादुरगंज नगर पंचायत में कुल 13 वार्ड है और इस नगर पंचायत में कुल वोटरों की संख्या 14042 है। यहां सरकार चाहे जिसकी हो लेकिन बहादुरगंज नगर पंचायत पर पिछले तीन बार से लगातार अंसारी बंधु का दबदबा रहा है। बहादुरगंज नगरपंचायत में इस बार की चुनाव में ओबीसी महिला सुरक्षित हैं।

इस बार ये महिलाएं होंगी प्रत्याशी

इस नगर पंचायत पर अंसारी बंधुओं के समर्थन से तीन बार चेयरमैन की कुर्सी संभाल चुके चेयरमैन रेयाज अहमद अंसारी इस बार सभासद के लिए संभवत: वार्ड नंबर 11 से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। जबकि इस बार बसपा से रेयाज अहमद अंसारी घर की महिला चेयरमैन प्रत्याशी के रूप होगी। चेयर मैन पद के प्रत्याशी के रूप में रेयाज अहमद अंसारी की पत्नी या उनकी मां को मैदान में उतारा जाएगा। वहीं चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस से जकरिया की पत्नी को मैदान में उतारने की तैयारी में है। सपा से सबा परविन पत्नी ऐनामुल्ला, भासपा से आमिना बेगम पत्नी अब्दुल्ला राइनी और भाजपा से सोनी प्रजापति पत्नी अरविन्द प्रजापति और राजश्री पत्नी निरंजन शर्मा में से किसी एक को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में है। लेकिन अभी भाजपा की तरफ से चेयरमैन के प्रत्याशी के रूप में अधिकारिक घोषणाएं नहीं हो पायी है कि कौन चुनाव लड़ेगा।

भाजपा ने 13 वार्डों के लिए सभासदों की सूची जारी कर दी है। वहीं सपा, बसपा, भासपा और कांग्रेस ने बहादुरगंज नगरपंचायत के लिए सभी प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है। चुनावी आंकड़े- बहादुरगंज नगर पंचायत के चुनाव की घोषित होने के बाद निकाय चुनाव को लेकर नगर में सरगर्मी तेज हो गई है। चेयरमैन पद के लिए हुए चुनाव में अब तक कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका। अब तक इस कुर्सी पर नौ बार भाकपा, दो बार बसपा, दो बार भाजपा,एक बार सपा,एक बार कौएद काबिज रही।

1837 से 2012 तक का आकड़ा, जानिए इस सीट पर किसको कब कब मिली जीत

अगर सूत्रों की माने तो सन् 1837 में नगर पंचायत का दर्जा बहादुरगंज को मिला। अंग्रेजो के शासन काल में नगर पंचायत अध्यक्ष 1942 में भाकपा के नवेदाद खान हुए 1947 में गुलाबचंद 1952 में अबुल खान 1957 में निजामुद्दीन खान अध्यक्ष चुने गए 1962 1967 1972 रफ़ीउल्लाह खान हैट्रिक लगाई परंतु इनके निधन के बाद 1974 के उपचुनाव में हबीबुल्लाह खान अध्यक्ष चुने गए। 1977 में इस सीट पर पहली बार पिछड़ी जाति से अज़ीज़ुल्लाह नोमानी ने चेयरमैन की कुर्सी को संभाला और भाकपा के जीत रिकॉर्ड को कायम किया । लगभग 2 महीने के कार्यकाल के बाद 1977 से सुपर सीट हो जाने पर कार्यभार प्रशासन की देखरेख में चला गया। इसके उपरांत 1989 में लोकतंत्र प्रक्रिया में सामान्य सीट से बसपा के मकसूद खान ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला, 1995 में पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित सीट पर भाजपा की शांति वर्मा अध्यक्ष चुनी गई ,1998 में अविश्वास प्रस्तावना के चलते कुर्सी गंवानी पड़ी और राजेश वर्मा कार्यवाहक अध्यक्ष बने,1999 के उपचुनाव में भाजपा की अमीना बेगम ने चेयरमैन की कुर्सी संभाली, 2000 में सामान्य सीट पर बसपा से रेयाज अहमद अंसारी ने पहली बार, 2006 में पिछड़ी जाति से सपा के सिंबल से दूसरी बार तथा 2012 में सामान्य सीट से कौमी एकता दल के बैनर से हैट्रिक लगाकर अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। जारी अधिसूचना में यह सीट पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित किए जाने से चेयरमैन रेयाज अहमद अंसारी की पत्नी या उनकी मां बसपा के बैनर से मैदान में उतरने को तैयार हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक लोगों में चर्चा का विषय है कि जारी अधिसूचना के बाबत लोगों का मानना है कि हमेशा से नगर पंचायत बहादुरगंज सामान्य व् पिछड़ी जाति के बीच केंद्रित रहता है, अनुसूचित वर्ग को मौका नहीं मिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ सबका विकास की हकीकत कम से कम स्थानीय नगर पंचायत के चुनाव में तो नहीं देखने को मिल रही है। आम लोगों को उम्मीद थी इस बार सुरक्षित सीट होगी।

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