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मदरसों की जांच में खुली पोल, 546 में 305 बिना मान्यता के हो संचालित, अब इनके आय की होगी जांच

शासन के निर्देश पर हुई जांच में मदरसों में फर्जीवाड़ा का बड़ा खुलासा सामने आया है। जनपद में कुल संचालित 546 मदरसों में 305 मदरसे बिना मान्यता के चल रहे थे।

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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जनपद में 546 मदरसे संचालित थे। यह सारा खेल विभाग की मिलीभगत से चल रहा था। अब जांच में 305 मदरसे बिना मान्यता के चलते पाए जाने पर जहां विभाग में हड़कंप मच गया है। वही विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

मदरसों की मान्यता ना होने की पुष्टि के बाद, अब इनके आय की भी होगी जांच

बिना मान्यता के चल रहे मदरसों की रिपोर्ट जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजी गई है। मान्यता न होने की पुष्टि के बाद अब इनके आय की भी जांच होगी। यह जांच जिन तहसीलों के अंतर्गत यह मदरसे संचालित हैं। वहां के एसडीएम स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी। इन मदरसों पर आगे की कार्रवाई शासन के निर्देश पर होगी।

सिर्फ 6 मदरसों को पूरी तरह से मिलता सरकारी अनुदान

जनपद में सिर्फ 6 ऐसे मदरसे हैं। जिन्हें पूरी तरह से सरकारी अनुदान मिलता है। यहां के शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी की तरह वेतन भत्ते मिलते हैं। वहीं वर्ष 2016 तक करीब 300 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना के तहत अनुदान दिया जाता था। इसी बीच मदरसों की जांच हुई। जिसमें 49 मदरसों के अनुदान पर रोक लगा दिया गया था। अब जांच के बाद 305 मदरसे बिना मान्यता के चलते पाए गए हैं। जिनका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।

विकास भवन गोंडा IMAGE CREDIT:

परचून की दुकान की तरह जनपद में खुल गए थे मदरसे

जनपद में मानकों की अनदेखी कर परचून की तरह मदरसे खोले गए थे। अधिकांश ऐसे मदरसे थे जो सिर्फ कागजों में चल रहे थे। सिर्फ एक या दो कमरों में बोर्ड लगाकर मदरसों का संचालन किया जाता रहा। जिन 49 मदरसों के अनुदान पर रोक लगाई गई थी। उस समय जांच टीम को उन मदरसों में ना तो छात्र मिले और देखने से ऐसा लग रहा था कि वर्षों हो गए इन कमरों के ताले भी नहीं खुले। कारण उनके सामने बड़ी-बड़ी घास में भी उगाई थी। जांच टीम को बड़ा फर्जीवाड़ा मिलने पर इनके अनुदान पर रोक लगा दी गई थी।

मदरसों की जांच के लिए जनपद की 4 तहसीलों में अलग-अलग कमेटी का हुआ गठन

मदरसों की जांच के लिए जिले की 4 तहसीलों में अलग-अलग कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल थे। हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सभी तहसीलों के कमेटी के सदस्य रहे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गौरव स्वर्णकार ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मदरसों का सर्वे किया गया है। जांच कमेटी में एसडीएम बेसिक शिक्षा अधिकारी भी शामिल रहे। हम लोगों की कमेटी द्वारा समय से सर्वे करके जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। उनके माध्यम से यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। जनपद में 546 मदरसों के सापेक्ष 305 मदरसे बिना मान्यता के चलते हुए पाए गए हैं। आगे शासन का जैसा निर्देश होगा उस हिसाब से कार्यवाही की जाएगी।