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गोंडा जिले के मनकापुर तहसील टिकरी जंगल के बीच वन टांगिया का गांव बसा है। जंगल के बीच रहने वाले यह लोग आज भी आदिवासियों की तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
2018 तक इन गांव के वासियों को वोट देने का भी अधिकार नहीं था
टिकरी जंगल के बीच बसे रामगढ़, बुटहनी, अशरफाबाद और मनीपुर 4 गांव की आबादी करीब 5 हजार के आसपास है।
साल 2018 तक इन गांव के वासियों को वोट देने का भी अधिकार नहीं था। ना ही इनके गांव को राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त था।
टिकरी जंगल के बीच बसे इन गांव के लोग आज भी सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं इनको नहीं मिल पा रही हैं।
ग्रामीण बोले- सीएम आने के बाद आवास और सोलर लाइट मिली, लेकिन आजकल धूप नहीं हो रही
वन टांगिया गांव के बुटानी निवासी अमर सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में हमारे गांव में मुख्यमंत्री आए थे। उन्होंने कहा था कि इन लोगों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री के कहने पर हम लोगों को आवास और सोलर लाइट दिया गया था। उसके बाद हमारे यहां कोई कार्य नहीं हुआ।
हम लोगों के बच्चों को पढ़ने के लिए कोई विद्यालय भी नहीं है। हमारे यहां के करीब एक सैकड़ा बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। यहां से स्कूल की दूरी करीब 4 किलोमीटर है।
ऐसे में रास्ते में उन्हें जंगली जानवरों से खतरा बना रहता है। हम लोगों के यहां शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। इस समय धूप निकलती नहीं है। इसलिए सोलर चार्ज नहीं होता।
यहां पर आज भी बिजली नहीं पहुंची है। अमर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बिजली सड़क शिक्षा जैसी व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन 4 साल में सिर्फ आवास ही मिला है।
इस गांव नहीं जाती कोई सड़क, बीमार को चारपाई पर लादकर 4 किलोमीटर जाना होता है
टिकरी जंगल के बीच बसे इन गांव तक पहुंचने के लिए अभी तक कोई सड़क नहीं बन सकी। इन गांव की में अगर कोई बीमार पड़ता है। गंभीर अवस्था में उसे चारपाई पर लेकर 4 किलोमीटर दूर जाने के बाद सड़क मिलती है।
ग्रामीणों की बात पर भरोसा करें तो बरसात के समय में यहां तक कोई साधन लेकर पहुंचना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है।
साल 2018 में सीएम योगी ने दी इस गांव की पहचान
मुख्यमंत्री बनने की बाद वर्ष 2018 में सीएम योगी ने इस गांव का दौरा किया। मुख्यमंत्री अब तक दो बार इस गांव का दौरा कर चुके हैं। आजादी के बाद से बिना पहचान के जिंदगी जीने वाले वन टांगिया गांव के लोगों को राजस्व गांव का दर्जा देकर भू प्रमाण पत्र दिया गया।
उस समय मुख्यमंत्री ने दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं को देने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिया था। सीएम के निर्देश के 4 वर्ष बीत गए।
गांव मुख्य विकास अधिकारी को फोन करते रहे पर नहीं उठा फोन
मुख्यमंत्री ने इन 4 गांव को राजस्व का दर्जा दिया। यहां पर रहने वाले लोगों को खेती करने के लिए जमीन दी गई। उस जमीन का भू अधिकार पत्र भी इन्हें सौंपा गया। इन लोगों को रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए गए।
मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार से इस विषय में जानकारी के लिए उनके मोबाइल पर फोन किया गया। दो बार पूरी पूरी बेल बजने के बाद फोन न उठने के कारण प्रशासन के पक्ष की जानकारी नहीं मिल सकी।
Published on:
14 Jan 2023 06:39 pm
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