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अखिलेश यादव ने इस कद्दावर निषाद नेता को गोरखपुर से प्रत्याशी बनाया, वर्तमान संसद को नहीं मिला टिकट

बीजेपी व निषाद पार्टी में हो सकता है गठंधन, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले फिर बदला समीकरण

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Rambhul Nishad

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वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ में बीजेपी प्रत्याशी को हराने वाले वाले प्रवीण निषाद की जगह सपा ने पूर्व मंत्री रहे रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया है। अखिलेश यादव व मायावती के महागठबंधन से निषाद पार्टी के अलग होने के बाद ही सपा ने अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है। दोपहर तक निषाद पार्टी व बीजेपी में गठबंधन हो सकता है ऐसे में सपा ने पूर्व मंत्री को टिकट देकर अपने इरादे साफ कर दिये हैं।
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गोरखपुर संसदीय सीट को सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ माना जाता है। गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा, बसपा के साथ निषाद पार्टी ने मिल कर चुनाव लड़ा था। निषाद पार्टी के नेता प्रवीण निषाद को सपा ने अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाया था। महागठबंधन की ताकत का असर हुआ था कि पहली बार सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ में बीजेपी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव 2019 में सपा व बसपा के साथ निषाद पार्टी मिल कर इस सीट से चुनाव लड़ेगी। महागठबंधन से निषाद पार्टी जुड़ भी गयी थी लेकिन बीती रात अचानक समीकरण बदले और निषाद पार्टी ने गठबंधन से दूरी बना ली। इसके बाद बीजेपी व निषाद पार्टी के बीच गठबंधन होने की अटकले लगने लगी। शनिवार की दोपहर में गोरखपुर के संासद प्रवीण निषाद के बीजेपी में शामिल होने की संभावना है इसको देखते हुए ही अखिलेश यादव ने रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाने का ऐलान किया है। गोरखपुर सीट में निषाद वोटरों निर्णायक साबित होते हैं इसलिए सभी पार्टी चाहती है कि निषाद नेता उनके साथ जुड़ जाये।
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सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए प्रतिष्ठा की सीट है गोरखपुर
यूपी का सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के लिए गोरखपुर सीट प्रतिष्ठा का प्रश्र बन चुकी है। उपचुनाव हारने के बाद बीजेपी नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव में यह सीट उसके हाथ से निकल जाये। गोरखपुर के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर अमित शाह तक ने खास रणनीति बनायी है। ऐसे में बीजेपी व निषाद पार्टी का गठबंधन हो जाता है तो चुनाव लडऩे में आसानी होगी।
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