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आर्यभट्ट सेवा समिति ने ‘ऑनलाइन’ मनाया आर्यभट्ट जयंती समारोह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार किसी भी सार्वजनिक समारोह पर रोक लगाई गई है

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आर्यभट्ट सेवा समिति ने 'ऑनलाइन' मनाया आर्यभट्ट जयंती समारोह

आर्यभट्ट सेवा समिति ने 'ऑनलाइन' मनाया आर्यभट्ट जयंती समारोह

गोरखपुर. लॉकडाउन के चलते इस बार गोरखपुर के सूरजकुंड में आयोजित होने वाले आर्यभट्ट जयंती समारोह को ऑनलाइन सेलिब्रेट किया गया। हर साल आर्यभट्ट सेवा समिति इस समारोह का आयोजन पूरे मनोयोग और हर्षोउल्लास के साथ करती है, जिसमें यूपी सहित पूरे देश के ब्रह्मभट्ट समाज के लोग शरीक होते हैं। इस बार इन सभी लोगों को इंटरनेट के माध्यम से इस कार्यक्रम से जोड़ा गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आर्यभट्ट सेवा समिति से जुड़े लोगों ने बड़े धूमधाम से महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की जयंती मनाई और प्रबुद्धजनों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का जन्म 476 ई. में गोदावरी और नर्मदा नदी के मध्य अशमाका नामक स्थान पर हुआ था, जो इस वक्त महाराष्ट्र में है। त्रिकोणमिति के इस जनक ने ही पाई का दशमलव के बाद चार अंकों तक मान निकाला था। आर्यभट्टीयम नामक पुस्तक के माध्यम से पहली बार शून्य का उपयोग बताया था, जो गणित की मूल पुस्तक मानी जाती है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि सूर्य और चन्द्र ग्रहण का वैज्ञानिक कारण भी इसी महान मनीषी ने बताया था। उन्होंने गणित और खगोलशास्त्र के क्षेत्र में विश्वसनीय कार्य किए। यह हैरान और आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि आजकल के उन्नत साधनों के बिना ही उन्होंने लगभग डेढ़ हजार साल पहले ही ज्योतिषशास्त्र की खोज की थी।

कार्यक्रम के संयोजक गजेंद्र भट्ट ने कहा कि इस बार हम वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से आर्यभट्ट जयंती को ऑनलाइन मना रहे हैं। हमें गर्व है कि हम आर्यभट्ट के वंशज हैं। देश के प्रथम उपग्रह का नाम इस महान गणितज्ञ के नाम पर रखा गया है। वह अपने पीछे ज्ञान का ऐसा भंडार छोड़ गए, जिसकी उपयोगिता और उपयुक्तता आज भी है। मुख्य वक्ता पौहारी शरण मिश्रा ने कहा कि आर्यभट्ट ने गणित की मूल अवधारणाओं का विकास किया। उनके आधार पर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल हुई है। विशिष्ट अतिथि संजीत मिश्रा ने कहा कि आर्यभट्ट की देन शून्य के बिना आधुनिक गणित और विज्ञान की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। हम सभी को ऐसे महान पुरुष के दिव्य ज्ञान से रूबरू होकर समाज को गौरवान्वित करना होगा। इतना ही नहीं कोपर्निकस द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत की खोज आर्यभट्ट हजार वर्ष पहले ही कर चुके थे। उन्होंने सर्वप्रथम यह सिद्ध किया था कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।

दुनिया को शून्य और दशमलव का ज्ञान देने वाले इस महान गणितज्ञ की जयंती को यादगार बनाने के लिए आर्यभट्ट सेवा समिति की ओर से ऑनलाइन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान समिति द्वारा जरूरमंदों के लिए खाने-पीने के सामान और वस्त्र आदि का भी वितरण किया गया। इसमें अजय शर्मा, जितेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र मिश्रा, प्रमोद शर्मा, कुमोद चंद्र शर्मा, रमाशंकर ठाकुर, कौशलेंद्र शर्मा, महेंद्र मिश्र, प्रभाकर शर्मा, शशिभूषण शर्मा, अविनाश भट्ट, धीरेंद्र भट्ट, प्रभुनाथ शर्मा और शिवकुमार शर्मा सहित कई गणमान्य लोगों ने वीडियो कॉन्फेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।