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गोरखपुर टेरर कनेक्शनः मुुशर्रफ उर्फ निखिल की मुंहबोली बहन और मां में एटीएस तलाश रही कुछ अहम कड़ियां

एटीएस के रडार पर 300 बैंक खाते, व्यापारी भाइयों के खाते भी किए जा रहे सीज

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गोरखपुर। आतंकियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मामले में गिरफ्तार दस लोगों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में आधा दर्जन के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया जाएगा। ये लोग सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। यही नहीं इन लोगों के संपर्क के करीब तीन सौ बैंक खातों को भी एटीएस खंगाल रही है। इन खातों से विदेशों से लेनदेन हुए हैं। कई खातों से नेपाल भी पैसा भेजा गया है। हालांकि, एटीएस अभी काफी छानबीन कर आगे कदम बढ़ाने के मूड में है। एटीएस नाम बदलकर रह रहे आरोपी मुशर्रफ की मुंहबोली बहन और उसके साथी की मां को भी तलाश रही है।

व्यापारी भाइयों का खाता होगा सीज, तीन सौ खाते रडार पर

गोरखपुर शहर के व्यापारी भाइयों नसीम व नईम के बैंक खातों का भी डिटेल एटीएस ने जुटा लिया है। काफी अनियमित ट्रांजेक्शन और संदिग्ध तरीके से धन ट्रांसफर की जांच के लिए इनके खातों को सीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इन भाइयों सहित अन्य आरोपियों से एटीएस अगले पांच दिनों तक पूछताछ करेगी। कोर्ट ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। बताया जा रहा कि मोबाइल व्यापारी भाइयों का आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी से संबंध है। फोन पर बातचीत की बात भी साबित हुई है।
आरोप है कि दोनों भाई किसी पाकिस्तानी के कहने पर फर्जी नाम व पते पर खाते खुलवाते थे। खाता खुलवाने के बाद उस खाते में धन आता था। इन खातों से तमाम धन इधर-उधर होता रहा है। एटीएस ने इनसे जुड़े करीब तीन सौ खातों का फिलहाल पता लगाया है। यह वह खाते हैं जहां इनके द्वारा या इनके नेटवर्क के किसी व्यक्ति ने धन भेजे हैं या धन आया है।

मुंहबोली बहन और कथित मां की भी तलाश

गोरखपुर में गिरफ्तार मुर्शरफ मूल रूप से कुशीनगर के पडरौना का निवासी था। उसका असली नाम मुशर्रफ है। वह नाम बदलकर गोरखपुर में रहता था। उसके साथ आजमगढ़ का सुशील राय भी रहता था। बताया जा रहा कि इनके साथ एक युवती भी रहती थी जिनको ये लोग अपनी बहन बताते थे। सुशील ही मुशर्रफ को अपना बड़ा भाई निखिल के रूप में सबसे परिचय कराता था। एक महिला भी यहां आती थी जो खुद को सुशील और मुशर्रफ की मां बताती थी। मुशर्रफ को अपना बड़ा बेटा बताती थी। इसके अलावा एक युवक और आता था लेकिन कोई उसका नाम नहीं बता पा रहा। अब एटीएस इन तथाकथित रिश्तेदारों की तलाश कर रही ताकि कुछ अहम कड़ी को तलाशी जा सके।

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