ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि अधिशासी अभियंता ने कुलावे के मद में पचास लाख रुपये का भुगतान करा दिया, मगर कई भी इसका निर्माण हुआ ही नहीं। यही नहीं नहरों के मरम्मत के नाम पर भी बैकडोर से निविदा कराकर राजस्व को चूना लगाया गया है। इस कार्यालय का आलम यह है कि इंजीनियर साहब का सरकारी वाहन अपने साहब के इंतेजार में खड़े खड़े सड़ चुका है। पिछले 2 साल से इंजीनियर अपने कार्यालय में नहीं बैठे है और उनके अभाव में सरकारी वाहन ने भी दम तोड़ दिया जब कि कार्यालय कर्मचारियों और बाबुओं के भरोसे संचालित हो रहा है लेकिन शासन से लेकर प्रशासन तक को इस बात की जानकारी है, बावजूद इसके बाद कोई कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा ।