
मां दुर्गा का रक्त अभिषेक
गोरखपुर. मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्त अपने अपने तरीके से आराधना करते हैं। गोरखपुर के बांसगांव में श्रीनेत वंशीय क्षत्रिय अपने रक्त से मां का अभिषेक करते हैं। रामनवमी पर इस परंपरा को हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। श्रीनेत वंश के क्षत्रिय अपने 12 दिन के बेटे से लेकर बुजुर्गतम व्यक्ति भी अपने शरीर के नौ हिस्से से खून देकर अभिषेक करता। आज रामनवमी के अवसर पर सैकड़ो की संख्या में इस समाज के लोग जुटे और अपने रक्त से अभिषेक किया।
बासगांव में श्रीनेत वंश के क्षत्रियों की मां दुर्गा के अभिषेक की परंपरा बिलकुल अनोखी व ऐतिहासिक है। दशकों से यहां श्रीनेत क्षत्रिय अपने रक्त से मां का अभिषेक करते आ रहे हैं। इसे बलि प्रथा के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रथा के अनुसार यहां स्थित मां दुर्गा के प्राचीन मंदिर पर नवरात्री में नवमी के दिन श्रीनेत वंशीय क्षत्रिय इकठा होते हैं। फिर अपने नौ अंगों से रक्त निकाल कर मां का अभिषेक करते हैं। आश्चर्यजनक यह है कि एक ही छुरे से सैकड़ों लोगों के शरीर पर हल्का सा वार कर खून निकाला जाता है। इस परम्परा के साक्षी संजीव बताते हैं कि कटे स्थान पर राख और भभूत लगा दिया जाता है।
वह बताते हैं कि नवमी के दिन करीब 10 हजार श्रीनेतवंशी जुटते हैं और शरीर के नौ अंगों के रक्त से अभिषेक करते हैं। देश-विदेश में रहने वाले यहां के लगभग 90 फीसदी स्थानीय लोग इस दिन गांव वापस आते हैं। गांव के एक अन्य व्यक्ति सुधीर कुमार बताते हैं कि यह मां की महिमा ही है कि एक ही छुरे से सैकड़ों लोगों का खून निकाला जाता लेकिन आजतक कभी किसी को कोई इन्फेक्शन नहीं हुआ। यही नहीं जहां से खून निकाला जाता वहां देवी स्थान का राख और भभूत मल दिया जाता है।
केवल पुरुष ही आते है यहां
महिलाओं अथवा लड़कियों का इस दौरान वहां जाना वर्जित होता है। प्रथा को मनाने वाले बताते हैं कि बलि के लिए किसी के साथ कोई जबर्दस्ती नहीं की जाती। लोग अपनी आस्थानुसार स्वत: ही इसमें शामिल होते हैं।
by DHIRENDRA VIKRAMADITYA GOPAL
Published on:
29 Sept 2017 07:56 pm
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