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सरसों तेल समेत खाद्य तेलों के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर, क्यों बढ़े दाम, सरकार कराएगी जांच

यूपी के प्रमुख सचिव ने खाद्य एवं रसद विभाग व सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर उनसे खाद्य तेल एवं तिलहन का संग्रह, उत्पादन, डिमांड, सप्लाई के साथ ही कारोबार से जुड़े खातों और अभिलेखों का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

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eadable oil price hike

खाद्य तेल हुआ महंगा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

गोरखपुर. कोरोना संकट से जूझ रही आम जनता पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। सरसों, सूरजमुखी और मुंगफली समेत खाद्य तेलों के दाम आसमान को छू रहे हैं। खाद्य तेलों के दाम रिकाॅर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। सरसों का तेल जहां 185 तो वहीं रिफाइंड तेल 175 रुपये लीटर तक पहुंच चुका है। अब सरकार और शासन प्रशासन इस बात का पता लगाएगी कि आखिर खाद्य तेलों के दाम इतने क्यों बढ़े। कारोबारियों के स्टाॅक भी चेक किये जाएंगे। यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं इसके पीछे सटोरियों, जमाखोरों और कालाबाजारियों का हाथ तो नहीं। अचानक कीमतें बढ़ने के बाद अब शासन-प्रशासन स्तर पर इसपर नियंत्रण के लिये कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।


संयुक्त सचिव खाद्य ने खाद्य एवं रसद विभाग व सभी जिलाधिकारियों से तेल की खरीद बिक्री से जुड़े रिकाॅर्ड तलब किये हैं। प्रदेश के संयुक्त सचिव विनोद कुमार ने आयुक्त खाद्य एवं रसद विभग के साथ सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखे पत्र में खाद्य तेल एवं तिलहन का संग्रह, उत्पादन, डिमांड, सप्लाई के साथ ही कारोबार से जुड़े खातों और अभिलेखों का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा गया है।


कारोबारी नराज

सरकार के इस कदम से तेल के थोक कारोबारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि तेल के दाम सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बढ़े हैं। ऐसे में इस तरह की सख्ती ठीक नहीं। कारोबारी बढ़ती तेल के लिये वायदा कारोबार, सटोरियों, व पाम ऑयल के आयात पर रोक के साथ ही खाद्य तेलों पर भारी आयात शुल्क आदि को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। चेंबर्स ऑफ कामर्स के अध्यक्ष व थोक तेल कारोबारी संजय सिंहानिया के अनुसार इसके कई कारण हैं। प्रदेश में तिलहन की पैदावार काफी कम है। दूसरे प्रदेशों के अलावा विदेशों से भी खाद्य तेल आयात होता है। प्रदेश के व्यापारियों का खरीद-बिक्री का लेखा-जोखा वाणिज्य विभाग के सिस्टम पर मौजूद है। उन्होंने कहा है कि दूसरे राज्यों की अपेक्षा यूपी में खाद्य तेलों पर महंगाई कम है।


दाल की कीमतें बढ़ने पर भी आया था आदेश

सरकार ने ऐसा ही आदेश सूबे में दाल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने पर भी जारी किया था। तब दाल के दाम भी काफी बढ़ गए थे। सरकार ने तब भी कालाबाजारियों, सटोरियों और जमाखोरों पर लगाम कसने का काम किया था। हालांकि दाल की कीमतें कम होने के बाद सरकार ने अपना आदेश वापस ले लिया था।

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