
नेपाल से बहने वाली गंडक के नदी के तटबंधो पर कटान को रोकने के लिए भारत सरकार ही धन मुहैया कराती है। यह कार्य सिंचाई विभाग महराजगंज का बाढ़ खंड डिवीजन कराता है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि गंडक नदी नेपाल से निकलकर महराजगंज, कुशीनगर होते बिहार तक जाती है। यदि गंडक का तटबंध नेपाल में कहीं टूट गया तो सर्वाधिक तबाही भारत में होगी। इसलिए बाढ़ बचाव का कार्य कराने के लिए केंद्र सरकार धन देती है।
हर साल बाढ़ की समाप्ति के बाद जीएफसीसी की टीम आती है। जीएफसीसी का मुख्यालय पटना में है। टीम में यूपी बिहार के प्रमुख अभियंताओं के अलावा रुड़की इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भी आते हैं। दोनों तरफ तटबंधों का निरीक्षण करने के बाद वे अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजते हैं। उनकी ओर से चिह्नित प्वाइंट पर जो प्रोजेक्ट बनता है, उस पर कार्य कराया जाता है।
इस साल जीएफसीसी ने नौ परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। वे इस प्रकार हैं।
नेपाल के नवलपरासी जनपद में बड़ी गंडक नदी के दायें तट पर डाउन स्ट्रीम में स्पिल (छलकना) को बंद करने एवं ए गैप तटबंध के कटर संख्या एक पर स्पिल एवं नाले के समानान्तर में परक्यूपाइन लगाने तथा दीर्घकालीन बाढ़ सुरक्षा के लिए नदी के अध्ययन के कार्य की परियोजना। इस कार्य पर 266.53 लाख रुपये खर्च होंगे।
दूसरी परियोजना रेग्युलेटर निर्माण की है। इस पर 679.08 लाख खर्च होंगे।
तीसरी परियोजना डाउन स्ट्रीम में स्पिल बंद करने के लिए 445.51 लाख खर्च होंगे।
परक्यूपाइन लगाने के लिए 1068.50 लाख खर्च किया जाएगा।
बी गैप के स्पर की पुनर्स्थापना पर 625.28 लाख की लागत आएगी।
डाउन स्ट्रीम में परक्यूपाइन लगाने के लिए 789.90 लाख खर्च होगा।
नेपाल बांध के स्पर संख्या 3 के शैक भाग के पुनर्स्थापना कार्य की परियोजना। इस कार्य पर 605.20 लाख खर्च होंगे।
स्पर संख्या 5 की डाउन स्ट्रीम में एजक्रेटिंग के पुनर्स्थापना कार्य की परियोजना। इस पर 387 लाख की लागत आएगी।
नेपाल बांध पर बिटुमिनस सड़क की पुनर्स्थापना एवं स्लोप पर ग्रॉस ट्रफिंग कार्य की परियोजना पर 352.98 लाख खर्च किए जाने हैं।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केके राय ने कहा कि जो भी परियोजनाएं जीएफसीसी से स्वीकृत हैं, उन पर कार्य कराया जाएगा।
Published on:
05 Mar 2022 03:14 pm
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