
1923 में गीता प्रेस गोरखपुर में स्थापित हुआ था।
Gorakhpur Geeta Press: केंद्र सरकार ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार अहिंसक और अन्य गांधीवादी तरीकों के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन में योगदान के लिए है। 29 अप्रैल, 1923 को गीता प्रेस की शुरुआत मात्र ₹10 प्रति माह के किराए पर गोरखपुर के एक घर में हुई थी।
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के हिंदी बाजार क्षेत्र में 100 वर्षों से अधिक की यात्रा के बाद, गीता प्रेस, जो हिंदू धार्मिक ग्रंथों का दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाशक है।अब लगभग दो लाख वर्ग फुट के क्षेत्र में चलता है। यह वर्तमान में 15 भाषाओं में 1,850 प्रकार की किताबें प्रकाशित करता है। गीता प्रेस अब तक 930 मिलियन किताबें प्रकाशित कर चुका है, जिसमें इसकी मासिक पत्रिका 'कल्याण' भी शामिल है।
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भारत में गीता प्रेस की हैं 20 शाखाएं
गीता प्रेस की वर्तमान में भारत में 20 शाखाएं हैं। एक नेपाल की राजधानी काठमांडू में, साथ ही पूरे भारत में 48 रेलवे स्टॉल हैं। संगठन से लगभग 2,500 पुस्तक विक्रेता जुड़े हुए हैं।
गांधी शांति पुरस्कार में ₹1 करोड़ का नकद पुरस्कार
18 जून 2023 को संस्कृति मंत्रालय ने 2021 का गांधी शांति पुरस्कार गीता प्रेस, गोरखपुर को दिया। 1995 में सरकार द्वारा स्थापित, गांधी शांति पुरस्कार महात्मा गांधी द्वारा अपनाए गए आदर्शों को श्रद्धांजलि के रूप में एक वार्षिक पुरस्कार है। यह पुरस्कार राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, पंथ की परवाह किए बिना सभी व्यक्तियों के लिए खुला है।
पुरस्कार में ₹1 करोड़ का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प/हथकरघा वस्तु प्रदान की जाती है। पिछले पुरस्कार विजेताओं में इसरो और रामकृष्ण मिशन जैसे संगठन शामिल हैं।
Updated on:
22 Jun 2023 06:45 pm
Published on:
22 Jun 2023 06:41 pm
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