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Gorakhpur News : सौ वर्षों का निःस्वार्थ कर्मयोग …आज करोड़ो हिंदुओ की आस्था बन गया गीता प्रेस

गीता प्रेस के प्रोडक्सन मैनेजर आशुतोष कुमार उपाध्याय बताते हैं कि जब गीता प्रेस की स्थापना हुई तब लेटर प्रेस से ही छपाई का काम किया जाता था। लेटर प्रेस एक धीमी प्रक्रिया थी। उस समय पुस्तकों की डिमांड भी कम थी। धीरे- धीरे कई दशकों तक ऐसे ही चलता रहा।

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Gorakhpur News

Gorakhpur News : सौ वर्षों का निःस्वार्थ कर्मयोग ...आज करोड़ो हिंदुओ की आस्था बन गया गीता प्रेस

GorakhpurNews : विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस आज हर हिंदुओं की आस्था से जुड़ चुका है, यह अनायास ही नही हुआ है अपितु इसके पीछे सौ वर्षों का निःस्वार्थ कर्मयोग है। यह कर्मयोग जो इसकी स्थापना से शुरू होकर वर्तमान तक और आशा है की आगे भविष्य में भी स्वर्णिम प्रकाश बिखेरता रहेगा।

गीता प्रेस की स्थापना के स्वर्णिम काल के साक्षी बनेंगे PM मोदी

गीता प्रेस आज शताब्दी वर्ष समापन समारोह मना रहा है। इस समारोह को और खास बनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गोरखपुर आ रहे हैं। पीएम सात जुलाई को समापन समारोह में शामिल होंगे। गीता प्रेस व प्रशासन इसे खास बनाने की तैयारियों में लगा है। गीता प्रेस की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी। आज हम यह जानेंगे कि पूरे विश्व में धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाले गीता प्रेस ने इन सौ सालों में छपाई के तरीकों में क्या परिवर्तन किया। कौन सी मशीनें हैं जो यहां के प्रकाशन को आसान बनाती हैं।

कई दशकों तक लेटर प्रेस से होती रही छपाई

गीता प्रेस के प्रोडक्सन मैनेजर आशुतोष कुमार उपाध्याय बताते हैं कि जब गीता प्रेस की स्थापना हुई तब लेटर प्रेस से ही छपाई का काम किया जाता था। लेटर प्रेस एक धीमी प्रक्रिया थी। उस समय पुस्तकों की डिमांड भी कम थी। धीरे- धीरे कई दशकों तक ऐसे ही चलता रहा।

ऑफसेट की मशीनें लगने के बाद पुस्तकों की मांग भी बढ़ी

जब ऑफसेट की खोज हुई उसके बाद ये मशीनें गीता प्रेस में लगनी शुरु हुईं। स्थापना के कई दशकों बाद लगभग 60 वर्षो बाद ऑफसेट मशीनें यहां लगाई गयी। फिर इसी से छपाई शुरु हो गयी। गीता प्रेस के पुस्तकों की डिमांड भी बढ़ती गयी।

मांग बढ़ने के बाद बाइंडिंग मशीन लगीं

जब गीता प्रेस में ऑफसेट मशीनें लगी तब पुस्तकों के प्रकाशन की संख्या भी बढ़ गयी। आए दिन डिमांड बढ़ने से अब यह संभव नहीं था कि हाथ से बाईडिंग की जाए। तब गीता प्रेस प्रबंधन ने भारत की लोकल बाईडिंग मशीनों को यहां मंगाया।

हाईटेक मशीनों से प्रकाशन भी कई गुना बढ़ा

आशुतोष उपाध्याय बताते हैं कि जैसे- जैसे समय बदलता गया, गीता प्रेस में नई मशीनों के आने का क्रम भी बढ़ता गया। पिछले 15 सालों में हमने हाई स्पीड की हाईटेक मशीनें यहां लगानी शुरु की। इन मशीनों के लगने से पुस्तकों का प्रकाशन प्रतिदिन कई गुना ज्यादा हो गया। इस कारण हमें हाईटेक बाईडिंग मशीनें भी लगानी पड़ी।

जापान, जर्मनी सहित इन देशों की लगी हैं मशीनें

छपाई की मशीनें जापान से मंगाकर यहां लगाई गयी हैं। इसके साथ ही बाइडिंग के लिए यहां जर्मनी व इटली की मशीनें लगी हुई हैं। कलर छपाई के लिए जापान की मशीनों का प्रयोग किया जाता है। धागा सिलाई के लिए जर्मनी की मशीनों का उपयोग होता है।


वेब ऑफसेट मशीनें , दोनो तरफ होती है छपाई

गीता प्रेस में आठ वेब ऑफसेट मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों की खासियत यह है कि एक साथ दोनों तरफ कागज की छपाई करती है। इसके साथ ही कागज की फोल्डिंग कर उसे बाहर निकालती है।

प्रतिदिन 70 हजार पुस्तकें प्रकाशित होती हैं

प्रोडक्सन मैनेजर बताते हैं कि इन हाईटेक मशीनों के लगने से प्रकाशन की क्षमता कई गुना बढ़ गयी है। वर्तमान समय में गीता प्रेस प्रतिदिन 70 हजार पुस्तकें प्रकाशित करता हैं। यहां प्रतिदिन 20 टन कागज की छपाई की जाती है।