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जिला अस्पताल में शो-पीस बनी बेड टू बेड ऑक्सीजन की व्यवस्था

बेड टू बेड ऑक्सीजन के लिए जिला अस्पताल में किया गया है इंतजाम,  बेड टू बेड इंतजाम में जिला प्रशासन प्रशासन ने खर्च किया लाखों

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HEAVY NEGLIGENCE IN SIDDHARTHNAGAR

REALITY IN HOSPITAL

सिद्धार्थनगर. ऑक्सीजन को लेकर किसी को परेशानी न हो न ही ऑक्सीजन के अभाव में किसी मरीज की जान जाने पाए इसके लिए जिला अस्पताल के प्रत्येक बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने का इंतजाम किया गया है। लेकिन यह इंतजाम मरीजों के अभी तक महज शोपीस बना हुआ है। अभी तक व्यवस्था के क्रियाशील नहीं होने के कारण सिलेण्डर के माध्यम से ही ऑक्सीजन देने के इंतजाम से काम चलाया जा रहा है। दो वर्ष पहले लाखों रूपए खर्च कर जिला अस्पताल के इमरजेन्सी वार्ड से लगायत जनरल वार्ड, सर्जिकल वार्ड, बर्न वार्ड, जेएसवाई वार्ड तक सभी बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछाई गई। लोगों को लगा कि अब उन्हें ऑक्सीजन के लिए भटकना नहीं पडे़गा इससे जिला अस्पताल के कर्मचारियों को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। लेकिन ऑक्सीजन को लेकर समस्य पहले जैसी ही है। ऑक्सीजन को लेकर आधुनिक इंतजाम होने के बाद भी अभी तक पुरानी व्यवस्था से ही काम चलाया जा रहा है। ऑक्सीजन सिलेण्डर बाहर से खरीद कर लाया जाता है। जरूरत पड़ने पर सीधे सिलेण्डर के माध्यम से मरीज को को ऑक्सीजन दिया जाता है। जबकि लाखो रूपए खर्च कर बेड टू बेड ऑक्सीजन पहुंचाने का इंतजाम किया है। जिसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। यहां पर ऑक्सीजन की मांग कम है। जिसके कारण अभी तक यहां पर किसी की मौत में ऑक्सीजन की कमी बड़ा कारण नहीं बना।

बेड टू बेड ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था शुरू नही हो पाने के पीछे तकनीकी गड़बडी बड़ा कारण है। लखनऊ से विशेषज्ञ के नहीं आने के कारण यह व्यवस्था अभी तक चालू नहीं हो पा रही है। इस व्यवस्था के शुरू हो जाने से मरीजों के साथ साथ जिला अस्पताल के कर्मचारियों की भी ऑक्सीजन को लेकर दुश्वारियां कम होंगी।

जिला अस्पताल में रिजर्व में है ऑक्सीजन सिलेण्डर
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की मांग कम होने के कारण कभी भी ऑक्सीजन की कमी का मामला सामने नहीं आया। फिर भी जिला अस्पताल की इमरजेन्सी में सात बड़ा भरा सिलेण्डर रिजर्व के रूप में रखा है जबकि एक क्रियाशील रहता है। इसी तरह से आईसीयू में 18 की संख्या में बडे ऑक्सीजन सिलेण्डर रखे गए हैं। अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदारों का कहना है कि यहां पर खाली सिलेण्डर नहीं रखा जाता है खाली पर उसे रिफिल करा लिया जाता है। जिससे अभी तक कभी भी ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई है।