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गोरखपुर विवि छात्रसंघ चुनाव प्रकरण में हाईकोर्ट ने किया विवि को तलब

दो सप्ताह में विवि को विधि छात्रों को वोटिंग से रोकने पर जवाब देना होगा

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डीडीयू

गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। विवि द्वारा विधि के सिक्थ सेमेस्टर के छात्रों को वोटिंग और चुनाव से वंचित किए जाने के मामले में विवि प्रशासन को तलब किया है। विवि को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का मौका दिया गया है।
छात्रसंघ चुनावों में गोरखपुर विवि द्वारा विधि के छठवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। विवि प्रशासन का तर्क यह है कि सिक्थ सेमेस्टर के वर्तमान छात्र अबतक विवि से पढ़कर निकल गए होते लेकिन सत्र लेट होने की वजह से वे अभी तक पढ़ रहे हैं। नियमतः वे इस सत्र में होने वाले चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं। चुनाव अधिकारी प्रो.ओपी पांडेय ने तर्क दिया था कि कुलपति के अलावा विवि छात्रसंघ चुनाव के लिए बने सलाहकार समिति के सामने भी इस मामले को रखा जा चुका है लेकिन सभी जिम्मेदारों ने विवि के निर्णय पर मुहर लगा दी। वोटिंग के अधिकार को लेकर छात्रों ने धरना-प्रदर्शन भी किया था लेकिन विवि ने उनकी एक नहीं सुनी। छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर पर्चा दाखिल करने वाले विधि के छात्र प्रणव द्विवेदी का पर्चा भी खारिज कर दिया था।
इसके बाद प्रणव ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई। कोर्ट नंबर 16 में जस्टिस संगीता चंद्रा की बेंच ने मामले में सुनवाई की। छात्रों की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार पांडेय व संजय पाठक ने पक्ष रखा। अधिवक्ताद्वय ने न्यायालय को छात्रों को अधिकार से वंचित किए जाने संबंधित विवि की मनमानी से अवगत कराया।
पीड़ित पक्ष की सुनने के बाद न्यायालय ने विवि को इस प्रकरण में तलब किया है। दो सप्ताह में विवि इस मामले में अपना पक्ष रखेगा।
बता दें कि छात्रसंघ चुनाव में गोविवि के विधि संकाय के एलएलबी सिक्थ सेमेस्टर के करीब ढाई सौ छात्रों को वोटिंग और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है।