गोरखपुर: तरकुलहा देवी का मंदिर चौरीचौरा से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। पूर्वांचल में मां तरकुलही देवी को बहुत आस्था है। आइये जानते हैं क्या है इसकी मान्यता...
गोरखपुर: तरकुलहा देवी का मंदिर चौरीचौरा से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। पूर्वांचल में मां तरकुलही देवी को बहुत आस्था है। यहां की मान्यता है कि क्रांतिकारी बाबू बंधु सिंह को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त था। वह यहां के घने जंगलों में रहकर माता की पूजा अर्चना करते थे और देश को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए अंग्रेजों की बलि माता को चढ़ाते थे।
बाबू बंधु सिंह , शिवाजी की गुरिल्ला पद्धति से अंग्रेजी पर हमला करते थे। इसीलिए उनसे अंग्रेज भी डरते थे, पर एक दिन अंग्रेजों ने धोखे से उनको पकड़ लिया और फांसी की सजा सुना दी।
जल्लाद ने जैसे ही उनको फंदे पर चढ़ाया, फंदा टूट गया। ऐसा लगातार 7 बार हुआ। फांसी पर चढ़ाते ही फंदा टूट जाता था। यह देखकर अंग्रेज भी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद बाबु बंधु सिंह ने मां से गुहार लगाई कि हे मां मुझे अपने चरणों मे ले लो। फिर मां ने पुकार सुन ली और आठवीं बार में उन्होंने फंदा खुद पहन लिया और उनको फांसी हो गई।
इस मंदिर में मुंडन, जनेऊ और अन्य संस्कार भी होते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर लोग यहां बकरे की बलि चढ़ाते हैं।