युवा कैरियर को लेकर परेशान हैं तो समाज के प्रति भी सचेत। वह चाहता है कि रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। हर किसी को दो जून की रोटी मिल सके। समाज से करप्शन का नामोनिशां मिटे और क्षेत्र का विकास हो। युवा भारती के अध्यक्ष अविजित मिश्र का कहना है कि विकास के लिए प्राइवेटाइजेशन जरूरी है। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और करप्शन भी कम होगा। मिथिलेश सोनकर का कहना है कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाई जानी चाहिए। वह फीस के नाम पर मनमानी करते हैं। इसके लिए सरकारी हस्तक्षेप को जरूरी बताया। सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों का अकांउट भी सार्वजनिक हो ताकि करप्शन खत्म हो सके। उग्रसेन सिंह, हर्सित मल्ल, आदित्य चैबे, अश्विनी, अरूण गौतम, दीपक कुशवाहा, दुर्गेश कुमार, रामकुमार, निर्भय, सतीश, सुनील आदि ने विभिन्न समस्याएं गिनायीं।