
ABVP
गोरखपुर। मुगलों ने विश्वविद्यालय पर आक्रमण कर परिषद संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया जबकि अंग्रेजों ने मैकाले शिक्षा पद्धति के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास किया परंतु हमारे महापुरूषों, क्रांतिकारियों ने भारतीय शिक्षा सभ्यता के रक्षा हेतु अपने प्राणों को आहुत कर दिया।
ये बातें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने कही। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में "विश्वविद्यालय परिसर एवं हमारी भूमिका" विषय पर आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में अम्बेकर ने कहा कि आजादी के पश्चात भारतीय शिक्षा व्यवस्था में संस्कृति और सभ्यता को बचाने एवं पुनः स्थापित करने के लिए 9 जुलाई 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना की गई और यह माना गया कि विद्यार्थी कल का नहीं बल्कि आज का नागरिक है व देशभर के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों का छात्र एक पढ़ा-लिखा नागरिक है जो देश के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में अपना योगदान दे सकता है।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, प्राचीन इतिहास और अतीत पर गौरव करना होगा। अपने पुरातन संस्कृति को भुलाकर 21वीं सदी के युवा विपरीत विचारधारा के पोषक हो रहे हैं, देश से पलायन कर रहे हैं। भारत वर्षों से बाह्य आक्रांताओं द्वारा गुलामी के बेड़ियों में जकड़ा रहा है, इन आक्रांताओं, क्रमशः मुगलों और अंग्रेजों ने सुनिश्चित ढंग से भारतीय निष्ठा, विश्वास, जीवन पद्धति, संस्कृति आदि को खंडित करने का कार्य किया है। अंग्रेजों ने तो इतिहास बदलने का कुप्रयास किया है। हजारों वर्षों से जमी ग़ुलामी की यह धूल युवाओं के द्वारा ही साफ की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि आज प्रशासनिक एवं शैक्षिक क्षेत्र में विद्वानों की कमी नहीं है एवं प्रोफेसर के रूप में विद्यमान आसीन हैं परंतु आज जरूरत सही दिशा देने की है। विश्वविद्यालयों के द्वारा न सिर्फ शिक्षा दी जानी चाहिए बल्कि उसके अनुप्रयोग की सही दिशा देने की आवश्यकता है। आज हर क्षेत्र में विद्यार्थी संगठित है नार्थ ईस्ट का विद्यार्थी आज ABVP के प्रयासों से पिछड़ा नहीं रहा। आज वहां के छात्र भी प्रत्येक क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी कर रहे हैं। आज जरूरत है, लोकतंत्र की हत्या करने वाले विपरीत विचारधारा से निपटने की, जिसके लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वामपंथियों द्वारा प्रायोजित हिंसा के विरुद्ध देश भर में 11 नवंबर को 'केरल चलो' का आह्वान किया है। इस अवसर पर मा. सुनील अम्बेकर ने छात्रों के द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर भी दिया।
प्राचीन काल के विश्वविद्यालयों से वर्तमान विवि को सीखना होगा
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही ने कहा की राष्ट्र कितना अच्छा होगा, यह निर्भर करता है विश्वविद्यालय की संस्कृति व शिक्षकों- विद्यार्थियों के संवाद पर। परिसर में विद्यार्थियों के आचरण पर प्राचीन भारत के विश्वविद्यालयों के तर्ज पर, उनकी संस्कृति से प्रेरित होकर, वर्तमान विश्वविद्यालयों को सीखना होगा।
कुलपति भी शामिल हुए विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रम में, दिया धन्यवाद
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी. के. सिंह ने कहा कि शिक्षकों को द्रोणाचार्य व चाणक्य जैसे शिक्षकों से सीखना चाहिए। आज भी पाश्चात्य देश भले ही आर्थिक रुप से हम से आगे निकल गए हों परंतु सांस्कृतिक रूप से वह आज भी पीछे हैं। कुलपति ने राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को धन्यवाद दिया। स्वागत भाषण प्रो. विपुला दुबे ने किया।
आभार ज्ञापन प्रो. सुषमा पांडेय ने, संचालन विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा श्रीवास्तव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. रविशंकर सिंह, क्षेत्रीय संगठन मंत्री रमेश गाड़िया, प्रान्त संगठन मंत्री कमलनयन, डॉ प्रदीप राव, विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता प्रो. गोपाल प्रसाद, शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद सिंह, डॉ. सुजीत चौधरी, महानगर अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह, वागीश राज पांडेय, राघवेंद्र, हर्षवर्धन सिंह, महानगर मंत्री, नवनीत शर्मा, नेहा सिंह आदि मौजूद रहे।
Updated on:
03 Nov 2017 12:16 pm
Published on:
03 Nov 2017 11:56 am
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