17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत में लागू करें शरिया कानून, जानिये कहां हुआ सेमिनार, जिसमें दी गई येे सलाह

यूनिफॉर्म सिविल कोड व ट्रिपल तलाक को लेकर रखा गया था सेमिनार। विभिन्न समुदाय के विद्वानों ने की शिरकत।

3 min read
Google source verification

image

Varanasi Uttar Pradesh

Oct 31, 2016

Seminar against Uniform Civil Code

Seminar against Uniform Civil Code

गोरखपुर. यूनिफार्म सिविल कोड पर गोरखपुर के स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाईजेशन की ओर से विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न समुदायों के विद्वानों ने अपने विचार रखे। सेमिनार में कई लोगो ने यूनिफार्म सिविल कोड की बजाये शरीयत कानून लागू करने के मांग कर डाली।





ष्समान नागरिक संहिता क्योंष् विषय पर शहर के बेनीगंज स्थित दुल्हन मैरेज हाउस में आयोजित सेमिनार में अहमद सगीर ने कॉमन सिविल कोड व समान नागरिक संहिता पर रोशनी डाली। सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता की जगह शरीयत का कानून लागू करने पर विचार करना चाहिए।उन्होंने बताया कि समय-समय पर ब्लात्कार के मामलों में इस्लामिक कानून की मांग समाज के हर तबके से उठती रही है। इस पर विचार करते हुए आर्थिक मामलों में इस्लामिक बैंक की स्थापना की जायें। 2006 की आर्थिक मंदी में इस्लामिक बैंक को नुकसान न के बराबर हुआ।अभी गुजरात में दो तीन माह पूर्व इस्लामिक बैंक खोला गया। इसी तरह अन्य मामलों में शरीयत कानून प्रभावी साबित होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र व राज्य स्तर पर उलेमाओं की समिति बने जो हर जुमा में होने वाले खुत्बे के लिए एक पत्र जारी करें। उस पत्र को पढ़ मुसलमानों को जागरुर किया जाए।





ईसाई धर्म के विद्वान अरुण प्रकाश ने कहा कि इस्लामी कानून(शरीयत) की बहुत अच्छाई हैं। इसी कानून के जरिए अभी सऊदी राजकुमार को हत्या के लिए फांसी दी गयी। शरीयत बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिन्हें आगे बढ़ाया जा सकता हैं। हमारा देश विभिन्न धर्म व संप्रदाय से मिलकर बना हैं। भारत जैसे देश में किसी एक धर्म के नियम को समाप्त कर पाना मुश्किल हैं। ईसाई समाज में शादी, तलाक, आराधना के नियम हैं अगर कोई सरकार इसमें हस्तक्षेप करती हैं तो हमें अच्छा नहीं लगेगा। जैन धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके यहां अलग नियम कायदा कानून है अगर उसमें सरकार हस्तक्षेप करेगी तो उस धर्म की आस्था को ठेस पहुंचेगी। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार को धर्म की आस्था में दखल देने का हक नहीं हैं। जब किसी भी धर्म का बहुसंख्यक तबका पर्सनल लॉ में बदलाव का पक्षधर नहीं है तो सरकारों को इसमें नहीं पड़ना चाहिए।


ये भी पढ़ें- narendra-modi-against-triple-talaq-issue-1416786/">तीन तलाक पर काजी-ए-बनारस की पीएम मोदी को चेतावनी, कहा सरकार बदल जाएगी, कानून नहीं


बामसेफ के एडवोकेट विक्रम दास ने कहा कि हमें संविधान की बुनियाद को समझना होगा। मजहबों, धर्मों में बंटे लोगों को अगर कोई एक माला में पिरोने का काम करता हैं तो वह संविधान हैं। सभी को समानता देने वाले संविधान को सरकारों ने लज्जित कर रखा हैं।देश के पर नजर दौड़ाने की जरुरत हैं। वर्ष 1948 में जनगणना के मुताबिक देश की आबादी 38 करोड़ थीं और गरीब 7 करोड़ (20 फीसदी) थे। वर्ष 2010 में अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक देश की जनसंख्या 120 करोड़ थी जिसमें एक नया वर्ग जिसे गरीबी रेखा से नीचे का वर्ग कहते है उनका प्रतिशत 83.6 हैं। 67 सालों में 20 फीसदी से 83 फीसदी गरीबी का स्तर चला गया। 83 फीसदी कुपोषण का शिकार हो गए। गुलाम भारत में 20 फीसदी व आजाद भारत में 83 फीसदी, जिनके पास खाना नहीं हैं। यह स्थिति इसलिए आई कि संसद, विधायिका व न्यापालिका में रियल प्रतिनिधित्व नहीं हैं। ऐसी स्थिति में न्याय बेमानी हैं। संविधान को दरकिनार किया जा रहा हैं। लागू करने में कोताही हैं। आज बहुमत की सरकार होने के बावजूद जिन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए उन मुद्दों से भटकाया जा रहा हैं।




वरिष्ठ चिकित्सक डा. अजीज अहमद ने कहा कि 1400 साल पुराना इस्लामी कानून आज के दौर का सबसे मार्डन नियम हैं। तीन तलाक तो एक सूरत हैं मियां बीवी से अलग होने की। जब ज्यादा जरुरत हो तभी दिया जा सकता हैं। गैर मुस्लिमों में तलाक का प्रतिशत 3.7 जबकि मुसलमानों में 0.5 प्रतिशत हैं। शहर ए काजी मुफ्ती वलीउल्लाह ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ पूरी दुनिया में एक है, जिसका आधार कुरआन और सुन्न्त है। इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। यह मुद्दा चुनावों में सीट व हिन्दुस्तान की दौलत लूटने के लिए के लिए परवान चढ़ाया जा रहा है।



अध्यक्षता करते हुए नसीम अशराफ ने कहा कि यह देश को असल मुद्दों से भटकाने की साजिश, चुनावी चाल है और सरकार का खोखला प्रोपगंडा हैं। इसे मुसलमान और सेकुलर लोग कभी कामयाब नहीं होने देंगे। संचालन आर्गनाईजेशन के गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष मोहम्मद राफे ने किया। इस दौरान औसाफ अहमद, डा. अब्दुल वली, इंजीनियर अब्दुर्रब , फैजान सरवर, समीर अहमद, अशफाक अहमद समेत बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें

image