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मुख्यमंत्री के जिले में इस खास बिरादरी के चहेते को नहीं मिला ठेका तो टेंडर देने के बाद निरस्त कर दिया अधिकारियों ने

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में टेंडर का खेल, टेंडर खुलने के बाद कर दिया निरस्त

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UPSRTC tender

गोरखपुर। मुख्यमंत्री के जिले में अधिकारियों की मनमानीपन थमने का नाम नहीं ले रही। टेंडर होने के बाद मनपसंद ठेकेदार को टेंडर नहीं मिलने पर उसे अकारण ही निरस्त कर दिया गया। मामला उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का है।
गोरखपुर के राप्तीनगर में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा बस डिपो पर कुछ काम चल रहा है। डिपो परिसर और उसकी जमीन पर लगे पेड़ों को कटवाया जाना है। इसके लिए बीते दिनों निगम द्वारा टेंडर निकाला गया था। पेड़ों को कटवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को टेंडर खोला जाना था।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार कुल छह लोगों ने इसके लिए टेंडर डाले थे। सरकारी रेट 950000 रुपये पर मुहरबंद निविदा मांगी गई थी। बुधवार को जब टेंडर अधिकारियों के सामने खोला गया तो शाहपुर क्षेत्र के रहने वाले जय प्रकाश यादव का टेंडर सबसे अधिक था। उन्होंने 1800300 रुपये में पेड़ों के कटान का टेंडर डाला था। टेंडर जय प्रकाश यादव को मिल गया। संबंधित कई अधिकारी उनको बधाई भी दे दिए।
लेकिन कुछ ही घंटे बाद जय प्रकाश यादव का टेंडर निरस्त कर दिया गया।
टेंडर डालने वाले जय प्रकाश यादव बताते हैं कि बुधवार की शाम को सबकी उपस्थिति में टेंडर खोला गया। दो अधिकारी भी वहां मौजूद रहे। अधिकारियों ने टेंडर खोलवाने के बाद उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर करवाए और टेंडर उनको मिलने की बधाई भी दी। जय प्रकाश बताते हैं कि यह सब चल रहा था कि एक दूसरे अधिकारी आए और हम लोगों को बाहर जाने को कहा गया। फिर कुछ ही देर के बाद बताया गया कि टेंडर निरस्त कर दिया गया है। कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि कम मूल्य का टेंडर पड़ा है। जय प्रकाश ने बताया कि सरकारी रेट साढ़े नौ लाख रुपये था और उन्होंने उसके दुगुने पर टेंडर डाला था। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से जब पूछा गया कि अगला रेट क्या होगा तो इनके द्वारा बताया गया कि साढ़े नौ लाख ही होगा। जय प्रकाश ने सवाल उठाया कि केवल उनको टेंडर देने से वंचित करने और अपने चहेते को टेंडर देने के लिए यह मनमानी की गई है। उन्होंने बताया कि टेंडर खुलने तक कोई गड़बड़ी नहीं होने की स्थिति में टेंडर निरस्त नहीं किया जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि संभव है कि जय प्रकाश यादव को टेंडर उनके सरनेम की वजह से नहीं मिला हो।

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