गोरखपुर के गौरसैरा में शिव पिंड़ी ( SHiv Mandir in gorakhpur) के दर्शन को दशकों से दूर दराज से लोग पहुंचते हैं। भगवान भोले शंकर ( Lord Shiva)की इस पिंड़ी का जलाभिषेक/दुग्धाभिषेक कर लोग मनचाही मुराद पाते हैं। कहा जाता है कि इस पिंड़ी की स्थापना सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के वंशज बिंदुसार (Samrat Chandra Gupta Maurya Son) ने करवाया था।
वसूही गांव के रहने वाले विकास बताते हैं कि ब्र्रह्मपुर ब्लाॅक का गौरसैरा व आसपास का क्षेत्र मौर्य वंश के राजाओं का प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। यहां आसपास के कई गांवों में मौर्य राजाओं के प्रभाव क्षेत्र होने के अवशेष मिलते हैं।
गौरसेरा में स्थित शिव मंदिर में स्थापित पिंडी के बारे में स्थानीय लोग बताते हैं कि मौर्य वंशज बिंदुसार ( Maurya dynasty successor Bindusar) ने इसकी स्थापना कराई थी। यह बेहद प्राचीन शिव पिंडी है। यहां मनोयोग से पूजा कर मांगी जाने वाली हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर ( Lord Shiv Temple) में सुबह सवेरे से ही लोग पूजन, अभिषेक करने पहुंच जाते हैं। सावन के पहले सोमवार को तो यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।
इस क्षेत्र में है मौर्य राज के अवशेष
यह क्षेत्र मौर्य वंश के राजाओं ( Maurya dynasty successor) के प्रभाव की कहानी कहता है। यहां कई खंडहर, मंदिर व उस समय के राजाओं से जुड़ी चीजें अवशेष के रूप में मिल जाएगी। कहा जाता है कि वसूही गांव मौर्य राजाओं ने बसाया था तो गौरसेरा गांव में अस्तबल व गौशाला हुआ करती थी। अवशेष आज भी इसके होने की कहानी कहते हैं।