2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आजादी के इस दीवाने से अंग्रेजों ने इस तरह लिया बदला, बेटियों पर जुल्म ढाए फिर पहुंचा दिया कोठे पर

आजादी के दीवानों की अनकही कहानियां

2 min read
Google source verification
basant saray gorakhpur

आजादी के इस दीवाने से अंग्रेजों ने इस तरह लिया बदला, बेटियों पर जुल्म ढाए फिर पहुंचा दिया कोठे पर

आजादी में सांस लेने के लिए न जाने कितने मतवालों ने अपनी एक-एक सांस इस देश के लिए कुर्बान कर दी। न अपनी फिक्र की न परिवार की, बस चिंता थी तो देश की, भारत की आजादी की। अंग्रेज जुल्म की इंतेहा करते रहे और आजादी के मतवाले गोरे अंग्रेजों की क्रूरता से दुगुने जोश में आजाद भारत के लिए गीत गाते रहे। वीर कुंवर सिंह के आह्वान पर अंग्रजों से लोहा लेने वालों में गोरखपुर के शाहपुर इस्टेट के राजा इनायत अली भी जंग-ए-आजादी के ऐसे ही दीवाने थे। अंग्रजों ने भारत मां के इस सपूत से ऐसा बदला लिया कि कोई भी बाप उसे शायद ही बर्दाश्त कर सके। राजा इनायत अली को फांसी पर लटकवाने के बाद अंग्रेजों ने इनकी दो बेटियों को कोठे पर तवायफ बनने को मजबूर कर दिया।
यह सन् सत्तावन के आसपास की घटना है। 1857। जब देश छोटी-बड़ी तमाम रियासतें जंग-ए-आजादी में कूदने के लिए सेनाएं तैयार कर रही थी। कई राजा-रजवाड़े आजाद हिन्दोस्तां के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बन रहे थे। गोरखपुर के शाहपुर स्टेट के शाह इनायत अली के हाथों में यहां की रियासत की कमान थी। जगह-जगह अंग्रेजों के खिलाफ ऐलान-ए-जंग हो चुका था। विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेज सैनिक रियासतों से भी मदद ले रहे थे। गोरखपुर में भी अंग्रेज अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते थे। इसके लिए अंग्रेजों ने आजमगढ़ से अपने गोरे अफसरों को भेजना था। अंग्रेजों ने सरयू नदी पार कराने के लिए शाहपुर के राजा इनायत अली से मदद मांगी। कमांडर एलिस का यह संदेश राजा इनायत अली तक पहुंचा। यह क्षेत्र उनके ही इलाका में आता था। राजा इनायत अली क्रांति का बिगुल फूंकने का मन बना चुके थे। लेकिन अंग्रेजों से सीधा लोहा थोड़ा कठिन था। पूरे विश्व में जिस ईस्ट इंडिया कंपनी का सूरज नहीं डूबता था उसके खिलाफ बगावत थोड़ा कठिन भी था। सो, राजा इनायत अली ने एक तरकीब सोची। अंग्रेजों से सीधे लड़ाई लड़ने की बजाय वह अपने नाविक से अंग्रेजों को सरयू पार कराने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी गुप्त संदेश भेजा कि बीच मझधार में वह नाव को डूबो दें। नाविकों ने ऐसा ही किया और 11 अंग्रेज अफसरों की जलसमाधि हो गई।
शाह के ही क्षेत्र में धुरियापार में नील कोठी थी। गोरे अपने परिवार के साथ यहां रहकर नील की खेती कराते और भारतीय मजदूरों और किसानों पर जुल्म ढ़ाते। आजादी के मतवालों की नजर इस कोठी पर पड़ गई। क्रांति के दौरान इस कोठी पर धावा बोल दिया गया। अंग्रेज परिवार किसी तरह बच गया। अंग्रेजी हुकूमत को जब यह पता लगा तो कलक्टर ने शाह इनायत अली से गोरे अंग्रेज के परिवार की रक्षा को कहा। शाह ने इनकार कर दिया। यह परिवार मारा गया। अंग्रेज कलक्टर ने शाह को भी गोरों की हत्या में आरोपी बनाया। इनको कैदकर दियागया। फिर फांसी दे दी गई।
अंग्रेजी शासकों की बर्बरता यही नहीं खत्म हुई। इन लोगों ने शाह की दोनों बेटियों को बंधक बनाया। उन पर जुल्म ढ़ाया और फिर कोठे पर पहुंचा दिया गया। बसंत सराय में स्थित खंडहर आज भी इनायत अली शाह की बेटियों संग हुई बर्बरता की दास्तां बयां करता है।

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

गोरखपुर

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग