
गोरखनाथ मंदिर व आरएसएस से मिली सीख ने बदल की डाॅ.सैयद एहतेशाम की जिंदगी
अपनी प्रोफेशनल जिंदगी से फुर्सत पाते ही डाॅ.सैयद एहतेशाम हुदा मदरसों, मौलवियों को चिट्ठियां लिखते हैं या कौमी एकता के लिए राष्ट्रवाद की राह पर चलने की नसीहत देते दिख जाते हैं। गोरखपुर में बचपन बिताने वाला बरेली का यह क्रिटिकल केअर पेन मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट्स इंजुरी एक्सपर्ट मुस्लिम युवा डाॅक्टर इन दिनों अपने अभियान को लेकर चर्चा में है। गोरखनाथ मंदिर व ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को आदर्श मानने वाले इस युवा के जेहन में मंदिर में हिंदू-मुस्लिम समानता की तस्वीर ऐसे घर कर गई कि आज वह उसके सामाजिक जीवन में दिख रही है।
एक तरफ जहां राजनीति ने हिंदू-मुस्लिम समाज के बीच एक बड़ी खाई बना दी है, यह युवा इस खाई को पाटने में लगा है। बलिया के खानपुर गांव का यह युवा बरेली में चिकित्सा सेवा में है। एक चिकित्सक के रुप में इनकी पहचान तो है ही मुस्लिम समाज में सुधार के नाम पर चलाए जा रहे इनके अभियान भी इन दिनों चर्चा में हैं।
डाॅ.एहतेशाम चर्चा में उस वक्त आए थे जब एक मदरसे में इन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिन पर केक कटवा दिया था। यह बात कट्टरपंथियों को नहीं सुहाई। लेकिन डाॅ.एहतेशाम ने संघ का साथ नहीं छोड़ा। अब वह आरएसएस व गोरखनाथ मंदिर के राष्ट्रवादी विचारों को समाज में बांटने के साथ इसके बारे में पनपी भ्रांतियों को खत्म करने में लगे हैं। वह मुस्लिम समाज को यह समझाने का अभियान चला रहे हैं कि देश का हर वर्ग जबतक मुख्यधारा में नहीं आएगा तबतक विकास का सपना अधूरा रहेगा। वह मदरसा अध्यापकों, प्रबंधकों के साथ लगातार बैठकें, सूफी खानकाहों, दरगाहों के सज्जादानशीनों से बात कर राष्ट्रवाद के रंग में रंगने की नसीहत दे रहे है।
डाॅ.एहतेशाम बताते हैं कि बचपन में गोरखनाथ क्षेत्र में बुआ के पास रहता था। उस वक्त गोरखनाथ मंदिर आना जाना हुआ करता था। वहां ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी देखते ही हम बच्चों को दुलारते। वह कभी भी किसी को प्यार करने में भेद नहीं किए। उनका आशीर्वाद ही है कि वह समाज की सेवा करने के लिए डाॅक्टर बन सका। इसलिए यह जीवन देश व समाज को दे रहा और कौमी नफरत को कम करने की कोशिश कर रहा।
बता दें कि डाॅ.एहतेशाम आरएसएस के ही एक विद्यालय से बारहवीं तक पढ़ाई किए। मंदिर और संघ से यह इतना प्रभावित हुए कि चिकित्सा क्षेत्र में आने के बाद सामाजिक कार्य में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। एहतेशाम ने वर्ष 1997 में देहरादून की एसबीएस यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी, मेरठ यूनिवर्सिटी से ऑर्थोपेडिक में मास्टर डिग्री और प्रयागराज डीम्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरो फिजियोथेरेपी में डिग्री हासिल की। इसके बाद वह भारतीय क्रिकेट टीम में चिकित्सक रहे डॉ. अली ईरानी से जुड़े और स्पोर्ट्स इंजरी की रेमेडी को सीखा। क्रिकेटर अजय जडेजा, महेंद्र सिंह धोनी का इलाज कर चुके डाॅ.एहतेशाम मदरसा तालीम में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के लिये भी प्रयासरत हैं।
गोरखनाथ मंदिर में जाकर पास होने की मांगते थे मन्नत
डॉ. एहतेशाम हुदा बताते हैं कि हम पूरी साल गर्मी की छुट्टियों का इंतजार करते थे। गुल्लक में सिक्के जमा करते थे। यह बचत के लिए नहीं था बल्कि मंदिर परिसर में भीम की बीस फीट लंबी प्रतिमा पर सिक्के डाल कर अपने उत्तीर्ण होने की प्रार्थना करने को था।
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Published on:
09 Sept 2019 03:03 am
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