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पूर्वांचल के इस बाहुबली पर भाजपा सरकार ने दिखार्इ थी दरियादिली, सौंप दी थी किसानों की किस्मत

केवल बहुजन सरकार ने ही नहीं जो भी सरकारें आई मिलों को बेचने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 9 May 2018, 6:44 PM IST

political news

भाजपा

गोरखपुर। यूपी के चीनी मिलों को कौडियों में बेचने का आरोप लगाने वाली भाजपा भी दूध की धुली नहीं है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में भी चीनी मिलों का सौदा करने में काफी उदारता दिखाई गर्इ थी। चीनी मिलों को रसूखवालों को बेचकर अपना राजनैतिक लाभ उठाने का काम सबसे पहले नब्बे के दशक में ही शुरू हो गया था। पूर्वांचल की चार चीनी मिलों को तत्कालीन भाजपा सरकार में पूर्वांचल के बाहुबलि पूर्व मंत्री की कंपनी को सौंप दिया गया था। आलम यह कि कंपनी ने अपनी लागत निकालने के लिए चीनी मिलों की काफी मशीनों व स्क्रैप को बेचकर अपनी फंसी पूंजी तो निकाल ली लेकिन मिलों की स्थिति बद से बदतर हो गई।
बसपा सरकार में बेची गई चीनी मिलों की सीबीआई जांच की बात करने वाली बीजेपी सरकार की पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में भी चीनी मिलों को बेचकर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया गया। किसानों के नकदी फसल के रूप में केवल एक गन्ना ही विकल्प है। सरकारों ने किसानों के नाम पर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हर कार्यकाल में खेल खेला। करीब डेढ़ दशक पूर्व की भाजपा सरकार में भी चार मिलों का सौदा किया गया था। यूपी के बाहुबलि पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का उस समय सत्ता में प्रभाव हुआ करता था। इसी प्रभाव और राजनैतिक गठजोड़ का फायदा उनको मिला। पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी की कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइजेज को सरकार ने चार चीनी मिलें दे दी। भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय की इन चीनी मिलों का मालिकाना हक पूर्व मंत्री की कंपनी को मिल गया। पडरौना, कठकुइंया, मढ़ौरा समेत चार चीनी मिलों को खरीदने वाली कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइजेज ने जब मिल चलाने की कोशिश नहीं की तो आंदोलन शुरू हो गया। लेकिन चीनी मिलें न चल सकी। जानकार बताते हैं कि गंगोत्री इंटरप्राइजेज ने अपनी पूंजी निकालने के लिए मिल के कबाड़ व अन्य स्क्रैप आदि को बेचकर अपनी लागत निकाल ली। इसके बाद बंद हालत में चीनी मिलों को सरकार को वापस कर दी। इसके बाद तो जो भी सरकार आई अपने चहेतों को मिलों को सौंपने का काम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

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