
नोएडा/बिसहड़ा. 28 सितंबर को दादरी में घटित अखलाक हत्याकांड के दो साल पूरे हो जाएंगे। इस घटना से जुड़े सभी आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं। लेकिन, पीड़ित परिवार आज भी डर के साए में जीने को मजबूर हैं। घटना के दो साल पूरे होने पर पत्रिका की टीम एक बार फिर बिसहड़ा गांव पहुंची और घटना के सारे पहुलुओं को बारिकी से जानने की कोशिश की। पेश है ग्राउंड पत्रिका की रिपोर्ट...
आज भी डर के साये में जी रहे हैं पीड़ित परिवार वाले...
अखलाक हत्याकांड के दो साल पूरे होने जा रहे हैं। इन दो सालों में बिसहड़ा गांव काफी बदल चुका है। लेकिन, जो नहीं बदला है वह पीड़ित परिवार का भय। दो साल गुजर जाने के बाद भी अखलाक के परिवार वाले वापस गांव आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इस मामले में जब हमने अखलाक के बड़े भाई अफजाल से बात की तो उनका कहना था, 'घटना के बाद से ही हम गांव से बाहर रहने को मजबूर हैं। हमारा किसी से झगड़ा नहीं था। लोगोंं के यहां नल वगैरह ठीक कर हमरा गुजारा चलता था। लेकिन, एक हिंसा में हमारा बंदा मारा गया और हम घर से बेघर हो गए। इसके बावजूद हम शांति से रहे।' अफजाल ने आगे बताया, ' अब सारे आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं और हम काफी डरे हुए हैं। हमें अक्सर धमकियां मिल रही हैं। हर पल डर में बीत रहा है। हमें कोर्ट और सरकार पर भरोसा है। हमारा यह भी मानना है कि खुदा इंसाफ जरूर करेगा।
कभी हो सकता है हमला
अफजाल के मुताबिक, हमलोग दो साल से डर-डर कर जी रहे हैं। ये लोग हमें कभी भी मार सकते हैं या मरवा सकते हैं। वह दबंग लोग हैं। अखलाक के बड़े बेटे को पुलिस सुरक्षा मिली है। छोटे बेटे दानिश और हमें तो सुरक्षा भी नहीं मिली है। बता दें कि इस घटना के बाद अफजाल और उनका परिवार शहर में किराये पर घर लेकर रहता है और मजदूरी करके रोजी-रोटी चला रहे हैं।
घर लौटने की सोच भी नहीं सकते
अफजाल ने बताया कि हमें घर छोड़ने का काफी दुख है, लेकिन इन हालतों में हम वापस नहीं जा सकते हैं। उनका कहना था कि कौन जाना चाहेगा वहां, सारे आरोपी गांव में ही हैं। क्या उनके सामने हम रह सकते हैं। कभी नहीं। फैसले के बाद भी नहीं। इंसाफ के बाद भी नहीं। हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते।
संपत्ति पर कब्जे का संकट
अखलाक के घर से थोड़ी दूर संजय राणा का परिवार रहता है। उनके बेटे विशाल पर आरोप है कि उसने ही सबसे पहले मंदिर से उदघोषणा कर लोगों को वहां जुटाया और हमले के लिए उकसाया। संजय के परिवार के 9 सदस्य इस घटना में आरोपी हैं। संजय के मुताबिक, अखलाक के परिवार की एक इंच भी जमीन बिसहड़ा गांव में न कभी थी और न आज है। मेरे ही परिवार की दी जमीन पर उनके मकान बने और वे भी इसे मानते आए हैं। रिकॉर्ड निकलवा लें, उनके परिवार के सारे मकान मेरे बुजुर्गों की जमीन पर बने हैं। आज भी राजस्व में हमारा नाम है। घटना के बाद उनका परिवार यहां से चला गया। इसके बाद से प्रशासन ने वह घर सील कर दिया है। वहीं, अफजाल का कहना है कि यह जमीन हमारी है। दस्तावेज में हमारे नाम हैं। जमीन उनकी है तो वे कोर्ट में इसे साबित करें। हमारे घर पर अब तक कोई सील नहीं लगी है। जब हमने घर छोड़ा था, तब डीएम एनपी सिंह को बताकर आए थे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आप बेफिक्र रहें। आपकी संपत्ति कोई टच नहीं करेगा।
गोमांस रखने के आरोप में हुई थी हत्या
बता दें कि 28 सितंबर 2015 को बिसहड़ा गांव के कुछ युवकों ने अखलाक की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। उन्हें शक था कि अखलाक का परिवार अपने घर में गोमांस रखे हुए है। घटना में अखलाक का छोटा बेटा दानिश बुरी तरह घायल हुआ था। पुलिस ने अखलाक की हत्या के आरोप में 18 लोगों को आरोपी बनाया है। इसमें तीन नाबालिग हैं। एक आरोपी रवि की गत मई में जेल में मौत हो चुकी है। बाकि 17 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं।

Published on:
25 Sept 2017 08:57 pm
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