
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा ‘हाईकोर्ट अपील पर सुनवाई करते समय क्रॉस आपत्तियों पर विचार करने के लिए बाध्य है।
Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कि हाईकोर्ट अपील पर सुनवाई करते समय क्रॉस आपत्तियों पर विचार करने के लिए बाध्य है। जस्टिस कृष्ण मुरारी और बेला एम. त्रिवेदी की बेंच ने मामले से जुड़े कानून और पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए ये फैसला सुनाया है।
बेंच ने कहा है कि जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में फैसला देते वक्त अपीलकर्ता किसानों की आपत्तियों पर विचार नहीं किया। कोर्ट अपीलकर्ताओं की दायर की याचिका पर क्रॉस आपत्तियों पर विचार करने के लिए वाध्य है। इससे यही लगता है कि हाईकोर्ट ने अपनी उस जिम्मेदारी को नहीं निभाया।
क्या है जमीन अधिग्रहण का मामला?
अप्रैल,1993 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जमीन का अधिग्रहण किया था। प्राधिकरण ने अगस्त 1993 से मई 1994 के बीच जमीन पर कब्जा भी ले लिया था। इसके बाद प्राधिकरण ने जमीन की तीन दरों 32 रुपये 52 पैसे प्रति वर्ग गज, 22 रुपये 44 पैसे प्रति वर्ग गज और 16 रुपये 46 पैसे प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजा देने की घोषणा की थी। इसके खिलाफ किसानों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की और ज्यादा मुआवजे देने की मांग की। इस मामले पर सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश ने मई 2002 में किसानों की जमीन का बाजार मूल्य 400 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश के फैसले को सही ठहराया था।
Updated on:
16 Jul 2023 12:07 pm
Published on:
16 Jul 2023 12:05 pm
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