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गाजा : इजरायली सैनिकों के हमले में 16 फिलिस्तीनियों की मौत, 1500 से ज्‍यादा घायल

यह बमबारी ऐसे समय में की गई जब सीमा के पास भारी संख्‍या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे।

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गाजा पट्टी : विवादित गाजा पट्टी में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। इजराइली सेना की ओर से गाजा पट्टी पर छोड़े गए आंसू गैस, बुलेट और लाइव फायर में 16 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई और 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इजराइल की ओर से हुई उस समय बमबारी की गई जब सीमा रेखा के पास हजारों की संख्या में फिलिस्तीन नागरिक मार्च ऑफ रिटर्न' नाम से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इजराइल की ओर से 6 जगहों पर फायरिंग की गई। यह विरोध ऐसे समय हो रहा है जब कुछ दिनों के अंदर अमेरिका येरूशलम में अपना दूतावास खोलने जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि इजरायली सेना ने सीमा की बाड़ तक फिलीस्तीनियों को पहुंचने से रोकने के लिए और अधिक सैनिकों, हथियारबंद वाहनों, स्नाइपर्स, खोजी कुत्तों, रबर बुलेट और कारतूस आदि भेजा है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल केद्रा ने कहा, "इससे पहले सीमा के समीप इजरायली सैनिकों ने खान यूनिस के पूर्व अल-गरारा शहर में दो किसानों को निशाना बनाया, जिसमें उमर वाहिद सामुर (27) की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। बाद में, इजरायली सैनिकों ने पूर्वी गाजापट्टी के समीप छह और फिलीस्तीनी प्रदर्शनकारियों को मार डाला।

17000 प्रदर्शनकारी हैं जमा
इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने कहा कि सीमा क्षेत्र पर पांच विभिन्न जगहों पर लगभग 17,000 फिलीस्तीनी आए हुए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह मार्च इजरायल के साथ तकरार को भड़काने का सोचा समझा प्रयास है और इससे होने वाले संघर्ष की जिम्मेदारी फिलिस्तीनी संगठन हमास व अन्य संगठनों की होगी। इजरायली सेना के प्रवक्‍ता ने बताया कि दक्षिणी गाजा पट्टी में दो संदिग्ध लोग सुरक्षा कवच भेदने की कोशिश कर रहे थे, इसके बाद उनकी तरफ से यह फायरिंग की गई।

हमास के समर्थन में वहां जुटे थे प्रदर्शनकारी
इजरायल ने यह बमबारी ऐसे समय में की है, जब वहां हजारों की संख्‍या में फिलीस्तीनी प्रर्दशन करने के लिए जुटे थे। 'द ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न' नाम के इस प्रर्दशन में महिलाओं और बच्‍चे भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य हमास का समर्थन करना है। हमास लंबे समय से फिलीस्‍तीन की आजादी के लिए संघर्ष कर रहा है और इजरायल के कब्‍जे वाले शहर येरूशलम पर अपना हक जताता रहा है। प्रर्दशनकारियों का कैंप अगले 6 हफ्ते तक यहां लगे रहने की संभावना है, क्योंकि 14 मई को येरूशलम में नए अमरीकी दूतावास का उद्धाटन होना है।

अमरीका ने विवादित शहर येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्‍यता दी है
मालूम हो कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर में ही विवादित शहर को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी। इसके बाद इजरायल और फिलीस्तीन विवाद फिर से हिंसक हो उठा है। 2008 के बाद हमास और इजरायल के बीच तीन युद्ध हो चुके हैं।

5 कैम्‍प लगाए हैं फिलीस्‍तीनियों ने
प्रदर्शनों के लिए फिलीस्तीनियों ने इसराइली सीमा के करीब पांच मुख्य कैंप लगाए हैं। ये कैंप इसराइली सीमा के नजदीक मौजूद बेट हनून से ले कर मिस्र की सीमा के पास रफाह तक फैले हैं। ये प्रदर्शन 15 मई को खत्‍म होंगे। इस दिन को फिलीस्तीनी नकबा यानी कयामत का दिन कहते हैं। साल 1948 में इसी दिन विवादित क्षेत्र इसराइल का गठन हुआ था और हजारों की संख्या में फिलीस्तीनियों को अपने घर से बेघर होना पड़ा था।

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