यमन के हौती विद्रोहियों का दावा, सऊदी अरब के 20 सैन्य ठिकानो पर किया कब्जा

  • यमन के विद्रोही समूह ने सऊदी अरब के 20 सैन्य ठिकानों पर कब्जा जमाने का किया दावा
  • सऊदी के सीमा से सटे इलाके में अचानक हमला कर किया कब्जा: हौती प्रवक्ता
  • हमले की अभी तक सऊदी अरब की ओर से नहीं हुई पुष्टि

By: Shweta Singh

Updated: 07 Jun 2019, 11:50 AM IST

हौती। यमन के विद्रोही समूह हौती ने सऊदी अरब के सीमा से सटे पड़ोसी इलाकों में कब्जा जमाने का दावा किया है। बुधवार को इस समूह ने दावा किया कि 'उनकी सेना ने सीमा पार कर सऊदी अरब में प्रवेश किया और 20 से अधिक ठिकानों पर अपना कब्जा स्थापित किया।' इस बारे में यमन की एक न्यूज एजेंसी की ओर से जानकारी मिल रही है।

सऊदी अरब के 200 से अधिक सैनिकों के प्रभावित होने का दावा

रिपोर्ट में हौती के प्रवक्ता यह्या सरई हवाले से बताया गया कि 'समूह ने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत नजरान पर अचानक आक्रमण करते हुए उसे अपने कब्जे में ले लिया है।' प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान सऊदी-यूएई गठबंधन की ओर से हौती विद्रोहियों से संघर्ष कर रहे करीब 200 सैनिक की प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई की हत्या हुई है और कई गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें उनके सैन्य उपकरण के साथ हिरासत में ले लिया गया है।

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हौती विद्रोहियों के दावों की नहीं हुई है पुष्टि

सरई ने आगे यह भी दावा किया कि उनके पास इस अभियान के वीडियो फुटेज हैं। इन्हें वे बाद में प्रसारित करेंगे। आपको बता दें कि अभी तक इन विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई है। इसके साथ ही सऊदी अरब प्रशासन या उनके सेना की ओर से भी इस पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं आई है।

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यमन में संघर्ष का इतिहास

गौरतलब है कि यमन में यह संघर्ष साल 2014 के अंतिम महीनों से शुरू हुआ। उस वक्त हौती विद्रोहियों और पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह की वफादार सेना ने साथ मिलकर राजधानी सना समेत राष्ट्र के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया था।

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इसके बाद मार्च, 2015 में उस वक्त युद्ध भड़क गया जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य संघठन ने हौती के खिलाफ हवाई मोर्चा खोल दिया। इनका मकसद इस समूह से कब्जेवाले इलाकों को छिनकर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के राष्ट्रपति अबू रब्बू मंसूर हादी से वापस करना था। यमन में चार साल से जारी इस संघर्ष में अबतक दस हजार से अधिक नागरिकों और लड़ाकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 85000 से अधिक बच्चे भूखमरी के शिकार हो चुके हैं।

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