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पीडब्ल्यूडी की 16 बीघा जमीन में से 13 पर हुआ कब्जा, शेष जमीन को अतिक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती

पत्रिका अलर्ट : पिछले काफी समय से चल रहा था वृद्धाश्रम, जो नए भवन में हुआ शिफ्टसंबंधित विभाग और प्रशासनिक उदासीनता के चलते नहीं रुक पाया अतिक्रमण

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पीडब्ल्यूडी की 16 बीघा जमीन में से 13 पर हुआ कब्जा, शेष जमीन को अतिक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती

पीडब्ल्यूडी की 16 बीघा जमीन में से 13 पर हुआ कब्जा, शेष जमीन को अतिक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती

गुना. शहर के नानाखेड़ी क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी की 16 बीघा जमीन है। जिस पर पिछले कई सालों में इतना ज्यादा कब्जा हो गया है कि वर्तमान में मुश्किल से 3 बीघा जमीन ही बची है। इसे भी बचाने में अहम योगदान वृद्धाश्रम का है। जो यहां पिछले कई सालों से संचालित था। लेकिन वर्तमान में यहां से हटाकर कैंट क्षेत्र में बने नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके बाद तो बची हुई जमीन को अतिक्रमण से बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि यहां न तो कोई देखरेख वाला है और न ही अतिक्रमण रोकने बाउंड्रीवॉल या तारफेंसिंग।
जानकारी के मुताबिक आईएएस श्रीमन शुक्ला गुना जिले में वर्ष 2014 में कलेक्टर थे। उनके कार्यकाल में भी नानाखेड़ी क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी की इस जमीन पर वृद्धाश्रम संचालित था। इस दौरान भी कई लोगों ने जमीन पर अतिक्रमण करने का प्रयास किया था। लेकिन तत्कालीन कलेक्टर श्रीमन शुक्ला ने समय रहते कदम उठाया और जमीन के चारों तरफ तारफेंसिंग भी करवाई। जिसे अतिक्रामकों ने काटने और तोड़ने का प्रयास भी किया। इसके बाद उन्होंने जमीन को सुरक्षित करने बाउंड्रीवॉल की मंजूरी भी दी। लेकिन इसी बीच उनका ट्रांसफार्मर हो गया। जिसके बाद न तो संबंधित विभाग पीडब्ल्यूडी और न ही किसी कलेक्टर ने इस जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास किए। यही वजह है कि धीरे-धीरे पहले कच्चा अतिक्रमण और फिर चोरी छुपे पक्के अतिक्रमण होते चले गए। वर्तमान में यह स्थिति है कि पीडब्ल्यूडी की कुल 16 बीघा जमीन में से मात्र 3 बीघा जमीन ही अतिक्रमण से मुक्त है शेष 13 बीघा जमीन पर पक्के मकान तक बन चुके हैं। इसके बाद भी अतिक्रामक चुप नहीं बैठे हैं। वे लगातार किसी न किसी माध्यम से कब्जे की तैयारी में लगे हुए हैं।
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इसलिए चिंता बढ़ी
पीडब्ल्यूडी की 16 में से जो 3 बीघा जमीन बची है। वहां अभी तक वृद्धाश्रम संचालित था। जहां 40 लोग निवास करते थे। इसके अलावा इनकी देखरेख के लिए तैनात स्टाफ व एनजीओ के सदस्य भी रहते थे। यही वजह है कि अतिक्रामक वहां तक नहीं पहुंच सके। लेकिन हाल ही में यहां से वृद्धाश्रम को कैंट की पुलिस लाइन क्षेत्र में बने नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में यह भूमि बिल्कुल सुनसान हो जाएगी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का तो पहले से ही इस भूमि पर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में यह भूमि कब तक मुक्त रह पाएगी कह पाना बड़ा मुश्किल है।
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पार्क डवलप कर बचा सकते हैं भूमि को
पीडब्ल्यूडी या प्रशासन चाहे तो इस जमीन के अतिक्रमण से बचा सकता है। इसके लिए उसे कुछ ज्यादा नहीं करना पड़ेगा। चूंकि मानसून सीजन आने वाला है। शहर में पहले से ही पौधे लगाने के लिए उपयुक्त जमीन का अभाव है। ऐसे में इस खाली पड़ी जमीन को पार्क के रूप में डवलप किया जाकर अतिक्रमण से बचाया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ प्रशासन को किसी समाज सेवी संस्था को यह जिम्मेदारी देनी होगी। वह इसे सर्वसुविधायुक्त और बेहद सुंदर पार्क के रूप में डवलप कर सकता है। जो सभी के लिए लाभदायक रहेगा। वैसे भी क्षेत्र में कोई बड़ा और अच्छा पार्क नहीं है। पुराने वद्धाश्रम की एक निशानी के तौर पर इस जमीन का उपयोग पार्क के रूप में किया जाना बेहदर विकल्प साबित हो सकता है।