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गायब हो गए 350 लोग! जानिए क्यों भाग रहे शहर के बाशिंदे

एमपी के गुना में 350 लोग गायब हो गए हैं। नगर पालिका उनकी तलाश में जुटी है पर वे कहीं नहीं मिल रहे। दरअसल नगरपालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुटीर बनाने के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। ऐसे 350 लोगों के नाम पर सरकारी पैसा आवंटित कर दिया गया, जो यहां मौजूद ही नहीं हैं।

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गुना

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deepak deewan

Jul 30, 2023

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एमपी के गुना में 350 लोग गायब हो गए

एमपी के गुना में 350 लोग गायब हो गए हैं। नगर पालिका उनकी तलाश में जुटी है पर वे कहीं नहीं मिल रहे। दरअसल नगरपालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुटीर बनाने के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। ऐसे 350 लोगों के नाम पर सरकारी पैसा आवंटित कर दिया गया, जो यहां मौजूद ही नहीं हैं।

नगर पालिका ने प्रति व्यक्ति को कुटीर बनाने के लिए पहली किश्त के रूप में एक-एक लाख रुपए की राशि आवंटित की थी। यह घोटाला किसने किया, उनके नाम और सही पते तक नगर पालिका के पास तक नहीं हैं। सूची में दर्ज नामों पर फोन लगाया रहे है तो एक ही जवाब मिल रहा है कि यह नंबर हमारा नहीं हैं और न ही हमने कुटीर ली है। खास बात ये है कि इनमें कोई मोबाइल नंबर तमिलनाडू का तो कोई कर्नाटक या दिल्ली का बता रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित कुटीरों का खेल फरवरी माह में शुरू हुआ। कुछ पार्षदों का कहना था कि हमारे वार्ड में कुटीर के लिए जिन्होंने आवेदन दिए थे, उनको कुटीर नहीं मिली। यह मामला उस समय और गरमा गया जब वार्ड 19 की महिला पार्षद अजब सिंह लोधा के वार्ड में 120 लोगों के खाते में एक-एक लाख रुपए की राशि पहुंची थी।

एक-एक लाख हजम
सूत्र बताते हैं कि नगर पालिका में कुटीर के लिए प्रथम किश्त मिलने वालों में 524 लोग थे। इनमें से जांच के दौरान साढ़े तीन सौ लोग ऐसे मिले जिनके नाम फर्जी तरीके से जोड़े गए थे और उनके नाम से एक-एक लाख रुपए की किश्त डाली गई थी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जहां एक और जगनपुर पर 720 हितग्राहियों को आवास बनाकर देना है तो वहीं 4477 कुटीर बनाने के लिए ढाई लाख की राशि आवंटित करना है। नगरपालिका में हुए फर्जीवाड़े से 350 लोगों के खाते में पहली किश्त एक-एक लाख रुपए चले गए। जिन लोगों के नाम यह पैसा जारी किया गया दिखाया है, वे अब नपा को ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। इनके न मिलने पर माना जा रहा है कि लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपए शासन का डूबत खाते में जाता दिखाई दे रहा है। इस पैसे की बंदरबांट करने और किश्त लेने वालों का आज तक कोई पता नहीं लगा है और न कोई कार्रवाई हो पाई है।

इस मामले में नपा के नेता प्रतिपक्ष शेखर वशिष्ठ और भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र रघुवंशी टिल्लू के नेतृत्व में पार्षदों ने कलेक्टर से शिकायत की थी। जिसमें कहा था कि नपा अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से करोड़ों का घोटाला हुआ है। कलेक्टर ने शिकायत पर तत्कालीन एडीएम आदित्य सिंह को जांच सौंपी थी। जांच पूरी कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी थी।

इस रिपोर्ट में तत्कालीन सीएमओ इशांक धाकड़ को दोषी मानकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा कर कलेक्टर ने प्रस्ताव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजा था। जांच में तत्कालीन सीएमओ, सब इंजीनियर गौरव ठाकुर और दो अस्थाई कर्मियों के नाम सामने आए थे, जिसमें सब इंजीनियर स्थानांतरित कर दिया है। दो अस्थाई कर्मियों के नाम डिफेन्स और बंटी बताए हैं।

मामले में गुना के सीएमओ विनोद शुक्ला बताते हैं कि लगभग 340 हितग्राही ऐसे हैं जिनको कुटीर बनाने के लिए पहली किस्त एक-एक लाख रुपए दिए थे। उनमें से कई लोग मिले नहीं हैं, कुछ लोगों के नाम नोटिस दिए हैं। नोटिस का जवाब न मिलने पर वसूली की जाएगी। इसके बाद एफआईआर भी कराई जाएगी

केस 1
वार्ड 25 के निवासी लक्ष्मीनारायण को नपा की और से कुटीर के लिए फरवरी-मार्च में एक लाख रुपए की राशि मिली थी। इस नाम के व्यक्ति की तलाश की गई तो वह नहीं मिला। उसके मोबाइल नंबर पर नगरपालिका की और से फोन लगाया गया तो यह नंबर आउट ऑफ कवरेज एरिया आता रहा। बाद में यह नंबर दिल्ली का होना बताया गया।

केस 2
वार्ड 8 में रहने वाले प्रेमनारायण को पक्का मकान होने के बाद भी कुटीर बनाने के लिए एक लाख की राशि नपा की और से मिली। जबकि यह पात्र भी नहीं था। इसका पता उस वार्ड में लगाया तो वह नहीं मिला और मोबाइल लगाया तो उस नंबर को उठाने वाले ने कहा कि यहां कोई प्रेमनारायण नहीं रहता है। नंबर उठाने वाले ने तमिलनाडु से बोलना बताया।

केस 3
वार्ड क्रमांक 19 में रहने वाले मनोज के नाम से कुटीर आवंटित हुआ। जिसके लिए उसको नगर पालिका की और से एक लाख रुपए की पहली किश्त उसके खाते में डाली गई। जब नगरपालिका के अधिकारी ने इस नाम के व्यक्ति की जांच की गई तो मामला पूरी तरह फर्जीं मिला। व्यक्ति की तलाश करने पर जो मोबाइल नंबर मिला वह भी फर्जी मिला।

ये है नियम
पीएम आवास नियम के तहत कुटीर बनाने के आवेदन करने के बाद जगह का फोटो खिंचने के बाद ही एक लाख रुपए हितग्राही के खाते में आएंगे।
कुटीर बनकर छत डलने के बाद जियो टैग होगा, उसके बाद उसे एक लाख रुपए और मिलेंगे।
कुटीर के प्लास्टर और पुताई के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली कुटीर आवंटित का नाम आदि उल्लेख होने पर पचास हजार रुपए और संबंधित हितग्राही को मिलेंगे।

इनके नाम जारी हुए पैसे, अब मिल नहीं रहे
फेहरान, लालाराम, मुलू, प्रेमलता, प्रेमनारायण, रामनारायण, भालू, सावित्री, तुलसा बाई, पवन कुमार, अनीश, वैशाली, खुशहाल सिंह, राधेश्याम, फूलसिंह, लता, मुकेश रजक, राकेश ओझा, लक्ष्मी बाई, मंजू, अख्तर खान, गुड्डन, अरमन, महेश कुमार, गोपाल कुशवाह, मुमताज बानो, घनश्याम साहू, लालजी राम, गुलशन बानो, प्यारेलाल, मीना, अशोक कुमार, भागचन्द्र, बंटी चंदेल, आनंद कुमार,मुन्नालाल, उधम सिंह, सीमा, सीता, लीलाधर आदि।