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निर्माण सामग्री महंगी, बिगड़ा बजट, घर बनाना हुआ महंगा

-कोरोना संक्रमण काल के बाद ईंट, रेत, भसुआ, सीमेंट से लेकर सरिया के दाम बढ़े

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गुना

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Praveen Mishra

Feb 22, 2022

निर्माण सामग्री महंगी, बिगड़ा बजट, घर बनाना हुआ महंगा

निर्माण सामग्री महंगी, बिगड़ा बजट, घर बनाना हुआ महंगा

गुना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है कि सन् 2024 तक हर व्यक्ति का मकान हो। इसके साथ-साथ हर व्यक्ति चाहता है कि उसका अपना खुद का घर हो। लेकिन इस उम्मीद को कोरोना काल के तीन चरणों ने काफी हद तक कमजोर कर दिया है। इसकी मुख्य बजह घर बनाने के लिए जरूरी मटेरियल के बढ़ते दाम हैं। यही बजह है कि जो लोग लोन लेकर अपना मकान बनाने की सोच रहे थे, उन्होंने फिलहाल यह इरादा टाल दिया है। क्योंकि भवन बनाने के लिए जरूरी सामान की कीमतों में इतना ज्यादा इजाफा हो गया है कि वह उसके बजट के बाहर जाने लगा है।
बिल्डिंग मटेरियल व्यवसाय से जुड़े दुकानदारों के मुताबिक भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में यह इजाफा कोरोना काल के प्रारंभ से शुरू हुआ है, जो अब तक जारी है। भवन निर्माण के लिए जरूरी सामान के रेट की बात करें तो कोरोना काल से पहले ईट 3700 रुपए प्रति ट्रॉली थी लेकिन अब इसके दाम 4500 से पांच हजार रुपए तक हो गए हैं। छत के प्लास्टर करने में उपयोग आने वाला भसुए का एक डंपर जो 50 हजार में आता था वह अब बढ़कर 62 से 65 हजार रुपए प्रति डंपर हो गया है, जिसमें एक हजार फुट माल आता है। आरसीसी भवन निर्माण के लिए जरूरी सरिया की पहले कीमत 45 रुपए किलो था, जो बढ़कर 57 से 58 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह सीमेंट के भाव 225-250 रुपए प्रति कट्टा था जो बढ़कर 300 से 400 रुपए तक पहुंच गया है। 8 हजार में आने वाली गिट्टी 12 हजार रुपए तक पहुंच गई है।
कोरोना काल और लॉक डाउन का असर बाजार पर
बिल्डिंग मटेरियल से जुड़े व्यवसायियों के मुताबिक कोरोना काल और लॉक डाउन का बाजार पर जो असर पड़ा है, उससे अभी भी वह उबर नहीं पाया है। हालांकि शासन-प्रशासन द्वारा दी गई रियायतों के कारण धीरे-धीरे चीजें सामान्य होने लगी हैं। लेकिन फिर भी अन्य कारणों के चलते दामों में तेजी बनी हुई है। ईट, गिट्टी, रेत, भसुआ, सरिया के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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खदानें बंद होने से बढ़े भसुआ के भाव
गुना जिले में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। यहां भसुआ जो शिवपुरी जिले से करैरा से आता था, जहां कोरेाना काल के बाद से रोक लगी है। जो भी भसुआ आ रहा है। वह चोरी छिपे आ रहा है। इसी बजह से वह महंगे दामों में बिक रही है।
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दाम बढऩे पर बीच में ही काम छोड़ा
शहर के नजूल कॉलोनी में अपना मकान बनवा रहे विनोद सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने मकान का काम कोरोना काल से पहले शुरू किया था। जैसे ही कोरोना काल शुरू हुआ और लॉक डाउन लग गया। इस वजह से कई माह तक काम रुका रहा। लेेकिन जैसे ही भवन निर्माण की अनुमति मिली तो बिल्डिंग मटेरियल मिलना मुश्किल हो गया। जो मिल रहा था वह काफी ऊंचे दामों पर दे रहे थे। इसी तरह बरखेड़ा में प्रधानमत्री आवास योजना के तहत अपना मकान बना रहे सीताराम ने बताया कि जितने पैसे सरकार दे रही है उस बजट में इस महंगाई के हिसाब से मकान बनाना काफी महंगा साबित हो रहा है। इसलिए फिलहाल उन्होंने मकान निर्माण बीच में ही छोड़ दिया है।
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कैसे पूरा होगा पीएम आवास
मकान निर्माण में लगने वाली सामग्रियों के बढ़ते दाम के बाद अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वालों मकानों पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में शासन द्वारा ऐसे लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है जिनके पास खुद की जमीन है और वह उसमें भवन का निर्माण कराना चाहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक 1 लाख 20 हजार रुपए तथा शहरी क्षेत्र में ढाई लाख रुपए प्रति हितग्राही दिया जाता है। उक्त राशि से दो कमरा, लेट्रिन बाथरूम एवं टैंक का निर्माण करना आवश्यक है। शासन द्वारा यह राशि किश्तों में दी जाती है। अब जब दाम काफी ज्यादा बढ़ गए हैं तो ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे भवन कैसे पूरे हो पाएंगे, इस संबंध में अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
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लॉक डाउन से पहले और अब
सरिया : 4000-5700-5800 प्रति क्विंटल
ईट : 3700-4500-5000 एक हजार
छत वाला भसुआ : 40000-62-65000 प्रति डंपर
गिट्टी : 1700-2200 रुपए प्रति ट्रॉली
काली बजरी : 3000-5000 रुपए प्रति ट्रॉली