
जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं भगवान भरोसे, सर्दी भरी रात में ओढऩे तक के लिए कंबल नहीं
गुना. मरीजों को बिछाने बैडशीट नहीं, ठंड से बचने कंबल नहीं। लैट्रिन-बाथरूम के गेट टूटे, गंदगी इतनी कि मरीज जा नहीं पा रहे। पूरे परिसर में जहां-तहां सीवर ओवर फ्लो होकर बह रहा है। मदर वार्ड से लेकर अस्पताल का कोई भी वार्ड हो हर जगह श्वान से लेकर सांड नजर आते हंै। यह हालात पिछले काफी समय से बने हुए हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे मरीज व अटैंडर बेहद परेशान हंै।
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं व व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। यही स्थिति तब है जब शासन ने यहां व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने प्रत्येक वार्ड में इंचार्ज से लेकर मॉनीटरिंग करने सुपरवाइजर, आरएमओ, प्रबंधक तथा सिविल सर्जन व सहअस्पताल अधीक्षक के रूप में तैनात किए हैं। यह सभी जिम्मेदार अधिकारी अपना कर्तव्य ईमानदारी से नहीं निभा रहे हैं। जिसके कारण ही अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आ पा रहा है।
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ऐसे खुली अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल
समाज सेवी विक्रम तोमर ने बताया कि उन्हें जिला अस्पताल गुना के मदर वार्ड से फोन आया कि भैया सर्दी के सीजन में जिला अस्पताल में मरीजों को बेडशीट व रजाई उपलब्ध नहीं है और न ही कंबल मिल रहे हैं। जानकारी लगते ही वह रात 9.30 बजे अस्पताल पहुंच गए। सिविल सर्जन, ड्यूटी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ से बातचीत की और सभी को बेडशीट उपलब्ध करवा दी। इसके अलावा जब अन्य वार्डों में जाकर मरीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि मदरबोर्ड में लेट्रिन बाथरूम चौक है। कारण जाना तो पता चला कि यह समस्या पिछले 6 महीने से बनी हुई है। वार्ड की नर्स अनीता व प्रभारी डॉ अजय गुप्ता को फोन लगाया लेकिन दोनों ने ही फोन नहीं उठाया। इसके बाद फिर से डॉ नरेंद्र धाकड़ से बात की। उन्होंने कहा की इंचार्ज डॉ अजय गुप्ता है मैं कुछ नहीं कर सकता। मामले के वीडिया व फोटो कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को भेज दिए गए। तब जाकर वार्ड की स्टाफ नर्स ने 4 मरीजों को कंबल और बैडशीट उपलब्ध करवाई। यहां बता दें कि शासन के नियमानुसार प्रत्येक वार्ड में हर पलंग पर भर्ती मरीज के लिए अलग से कंबल और बेडशीट की व्यवस्था होती है।
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6 दिन बाद भी नहीं बदली जा रही बैडशीट
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अस्पताल में मरीजों को भर्ती करते समय बैडशीट जरूर उपलब्ध कराएं। साथ ही उसके पलंग प्रतिदिन चादर बदलना अनिवार्य है ताकि उसे किसी तरह का इंफेक्शन न हो। वहीं किसी भी मरीज को बिना धुला या दूसरे मरीज का कंबल न दिया जाए।
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लैट्रिन-बाथरूम की स्थिति जाने लायक नहीं
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज सिर्फ अपनी बीमारी और घाव के दर्द से ही परेशान नहीं हैं। बल्कि इस दर्द को अस्पताल की अव्यवस्थाओं ने और ज्यादा बढ़ा दिया है। अस्पताल का वार्ड कोई सा भी हो हालात एक जैसे हैं। सबसे पहले तो वार्ड के लैट्रिन-बाथरूम की स्थिति बहुत खराब है। सीवर चौक होने से कई वार्डों की लैट्रिन तो उपयोग लायक ही नहीं बची हैं। जहां सीवर की समस्या नहीं है तो वहां टूटे गेट व गंदगी ने परेशानी बढ़ा दी है।
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काऊ कैचर से लेकर सुरक्षा गार्डों पर लाखों खर्च फिर भी मदर वार्ड में श्वान
जिला अस्पताल परिसर से लेकर मदर वार्ड में कभी भी श्वानसे लेकर सांड देखे जा सकते हैं। यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रबंधन जानवरों को रोकने अस्पताल के मेन गेट पर काऊ कैचर निर्माण पर लाखों रुपए खर्च कर चुका है। इसके अलावा अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात रहते हैं। जिनके वेतन पर भी लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद श्वान व अन्य जानवर अस्पताल परिसर में पूरे समय स्वच्छंत विचरण करते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं। हद तो यह है कि यह जानवर व श्वान सबसे जयादा संवेदनशील माने जाने वाले मेटरिनटी वार्ड व आईसीयू में तक कभी भी घुस जाते हैं।
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मरीजों की परेशानी उनकी जुबानी
मेरी बहू मदर वार्ड में भर्ती है। जिसे पलंग तो मिल गया लेकिन बिछाने न तो बैडशीट दी गई और न ही कंबल। मजबूरी में सर्दी से बचने घर से कंबल मंगाना पड़ा। वार्ड के अंदर हाथ और बर्तन धोने की कोई व्यवस्था नहीं है।
जानकी बाई, अटैंडर
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अस्पताल के मदर वार्ड की हालत बहुत खराब है। मरीजों को मिलने वाले खाने के डिब्बों को फेंकने डस्टबिन नहीं है। ऐसे में मरीज आने जाने वाले रास्ते में ही फर्श पर कचरा फेंक देते हैं। वहीं इस वार्ड में पूरे समय श्वान तथा सांड घूमते रहते हैंं। गार्ड होने के बाद भी वह इन्हें नहीं भगाते। मरीजों को हर समय खतरा बना रहता है। खासकर छोटे बच्चों को लेकर। यदि जरा भी अनदेखी हुई तो अनहोनी हो सकती है।
मोतीलाल, अटैंडर
Published on:
03 Jan 2022 11:57 pm

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