
गुना/अशोकनगर। उप्र में बसपा के प्रभाव का असर कभी-कभार गुना और अशोकनगर की कुछ सीटों पर देखने को मिलता है। हालांकि गुना जिले में अब तक बसपा खाता नहीं खोल पाई लेकिन अशोकनगर सीट पर 1998 में बसपा के उम्मीदवार जीत का परचम फहरा चुके हैं। अंचल में बसपा ने एक-दो बार भाजपा और कांग्रेस के जीत के समीकरण भी बिगाड़े हैं।
बमौरी : कांग्रेस को झटका
बमौरी सीट पर 2008 में बसपा के देवेंद्र सिंह रघुवंशी ने 17,046 वोट लेकर कांग्रेस को झटका दिया था। कांग्रेस के महेंद्र सिंह सिसौदिया को 23,989 वोट मिले थे। वे भाजपा के केएल अग्रवाल से 4,794 वोट से हार गए थे। 2018 में बसपा के डा. ओपी त्रिपाठी ने 7176 वोट हासिल किए। 2020 के उपचुनाव और 2013 के मुख्य चुनाव में रमेश डाबर मैदान में उतरे लेकिन उन्हें नाममात्र के वोट मिले।
राघौगढ़: दिग्गी से तालमेल
गुना जिले की राघौगढ़ सीट से 1998 और 2003 के चुनाव में बसपा ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ प्रत्याशी न उतारकर कांग्रेस को वॉकओवर दिया था। बसपा ने लक्ष्मण सिंह के खिलाफ 1993 में हरतुम सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया था, जिन्हें सिर्फ 4580 वोट मिले।
चांचौड़ा: नहीं चला जादू
2013 के चुनाव में कैलाशनारायण मीना 4942 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2008 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी हरि बहादुर सिंह मात्र 150 वोट लेकर अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे।
गुना : दिखाई थी ताकत
2008 में बसपा के केएल जाटव ने 11392 वोट लिए थे। कांग्रेस की संगीता रजक 16606 वोट ले पाई थीं। भाजपा ने गोपीलाल जाटव को टिकट दिया लेकिन उनका नामांकन खारिज हो गया। भाजपा ने निर्दलीय जगदीश खटीक को समर्थन दिया जिन्हें 15,110 वोट मिले थे। इस चुनाव में भारतीय जनशक्ति पार्टी के राजेंद्र सलूजा 29,540 वोट पाकर विजयी हुए थे।
अशोकनगर: एक बार जीत
1998 में यहां से बसपा के बलवीर सिंह कुशवाह चुनाव जीते। उन्होंने भाजपा के नीलमसिंह यादव को 11,500 मतों से हराया। कांग्रेस के राजाराम तीसरे स्थान पर रहे थे। 2020 के उपचुनाव में बसपा के टीआर भंडारी को 3,373 वोट मिले। 2018 में बसपा के बालकृष्ण को 9,559 वोट मिले। भाजपा के लड्डूराम कोरी कांग्रेस के जसपाल सिंह जज्जी से 9,720 वोटों से हार गए थे। 2013 में बसपा के बाबूलाल देहलवार ने 14, 677 वोट झटके थे।
चंदेरी: समीकरण बिगाड़े
चंदेरी सीट पर 2008 में बसपा के नारायण प्रसाद शर्मा ने 14,477 वोट हासिल किए। कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान भाजपा उम्मीदवार राव राजकुमार सिंह से 4,578 वोट से हारे। 2018 में राव राजकुमार सिंह बसपा से चुनाव लड़े। कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान जीते। भाजपा के भूपेंद्र द्विवेदी हारे। बसपा को 34,302 वोट मिले।
मुंगावली के हाल
इस सीट पर बसपा एक बार भी नहीं जीती लेकिन हर बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही है। 1993 कन्हईराम ने 16,257 वोट हासिल किए। 1998 में गौरीशंकर गुर्जर ने 7,354, और 2003 में डा. रतनलाल राय ने 7,969 वोट लिए। 2008 के चुनाव में राजाराम नागेश्री को 13,754 और 2013 के चुनाव में बलवीर को 12,081 वोट मिले। 2018 में बसपा प्रत्याशी कमल सिंह ने भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की, जिससे डा. केपी सिंह यादव कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह यादव से 2,136 वोटों से हार गए थे।
इस बार भी ठोंकी ताल, 7 नामों की घोषणा
इस बार भी बसपा ने कांग्रेस और भाजपा का गणित बिगाडऩे के लिए गुना की चार और अशोकनगर जिले की दो विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। बसपा ने गुना से भगवानलाल भंडारी, चांचौड़ा से राजेंद्र शर्मा, राघौगढ़ से धर्मेंद्र यादव और बमौरी से मनीषा धाकड़ को प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह मुंगावली से मोहन सिंह यादव और चंदेरी से वीरेंद्र सिंह यादव को उम्मीदवार घोषित किया है। अशोकनगर में अभी नाम की घोषणा नहीं हुई। कांग्रेस से 2020 में प्रत्याशी रही और हार चुकी आशा दौहरे ने हाल में टिकट न मिलने पर कांग्रेस से इस्तीफा दिया है। उन्हें बसपा उम्मीदवार बना सकती है।
कांग्रेस और भाजपा के बागियों का सहारा
अंचल में बसपा का अपना वोट बैंक 5 से 10 हजार के बीच सीमित है। इस पार्टी से चुनाव लड़े ज्यादातर नेता वे हैं, जिन्हें कांग्रेस या भाजपा से टिकट नहीं मिला। टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने ऐन चुनाव के मौके पर बसपा के हाथी की सवारी करना उचित समझा। जहां जिसका जितना प्रभाव रहा, वहां उसने बसपा के वोट बढ़ाए।
Updated on:
24 Oct 2023 11:36 am
Published on:
24 Oct 2023 11:32 am
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