
गुना/शिवपुर। जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम चंदनपुर बिनेगा में बीपीएल परिवारों के घर के बाहर- मेरा परिवार गरीब है, यह स्लोगन किसी और ने नहीं बल्कि जनपद पंचायत शिवपुरी के सीईओ ने लिखवाया। यह खुलासा तब हुआ, जब सूचना का अधिकार के तहत यह जानकारी निकलवाई गई। सरपंच-सचिवों को भेजे गए इस पत्र की एक कॉपी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के चेयर पर्सन तक शिकायतकर्ता अभय जैन ने भेज दी।
गौरतलब है कि तीन माह पूर्व चंदनपुर बिनेगा गांव में बीपीएल परिवारों के घरों के बाहर- मेरा परिवार गरीब है, के स्लोगन लिखे फोटोग्राफ सहित शिकायत लॉ-स्टूडेंट अभय जैन ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से की थी। आयोग ने जब यह मामला संज्ञान में लेकर कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदारों को नोटिस देकर प्रमुख सचिव मप्र से जब एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी, तो सभी जिम्मेदारों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि हमें नहीं पता, घरों के बाहर किसने लिखवाया। नोटिस जारी होते ही घरों के बाहर लिखा हुआ तो पुतवा दिया गया, लेकिन उस जिम्मेदार को बचाने का प्रयास किया, जिसने यह सब करवाया।
शिकायतकर्ता अभय जैन के साथी अभिनव विजयवर्गीय ने जब सूचना का अधिकार के तहत आवेदन लगाकर जानकारी निकलवाई तो पता चला कि 20 जून 2017 को जनपद पंचायत शिवपुरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एक पत्र सभी सरपंच/सचिवों को जारी किया था। जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया है कि सभी बीपीएल परिवारों के घरों की दीवार पर पक्के पेंट व पेंटर से नाम एवं क्रमांक आदि का लेखन कार्य करा दें, जिसमें परिवार के मुखिया का नाम लिखकर उसके आगे यह अवश्य लिखवाएं कि मैं एवं मेरा परिवार गरीब है।
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई कि दो दिन में यह कार्य किया जाए, अन्यथा आपके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं यह पत्र शिवपुरी जनपद के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों के अलावा कलेक्टर शिवपुरी, जिला पंचायत सीईओ व एसडीएम शिवपुरी को भी प्रतिलिपि भेजी गई। जबकि आयोग द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर सभी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले से अनजान बने रहे।
यह सिर्फ मानव अधिकारों का हनन ही नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक मूलाधिकार आर्टीकल 21 का भी उल्लंघन है। हमने जनपद सीईओ के द्वारा जारी किए गए पत्र को भी हमने चेयर पर्सन राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग दिल्ली को भेजकर यह मांग की है कि होने वाली जांच में इस पत्र को आधार बनाया जाकर दोषी पर कार्रवाई की जाए।
- अभय जैन, शिकायतकर्ता व लॉ-स्टूडेंट
Published on:
11 Mar 2018 06:18 pm
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