19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सादा मिट्टी और हर्बल रंगों से तैयार हों गणेश की मूर्तियां

सादा मिट्टी और हर्बल रंगों से तैयार हों गणेश की मूर्तियां

2 min read
Google source verification

गुना

image

Deepesh Tiwari

Jul 10, 2018

guna, guna news, guna patrika, patrika news, patrika bhopal, bhopal mp, god, gannu, ganesha, ganesh, bhagwan ganesh, mitti ki murti,

सादा मिट्टी और हर्बल रंगों से तैयार हों गणेश की मूर्तियां

गुना. जिला पर्यावरण केंद्र के सुचेता हंबीर सिंह द्वारा जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रकृति व पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने पर्यावरण अनुकूल भगवान गणेश व नवदुर्गा महोत्सव के लिए जगह-जगह जाकर मूतिकारों को जागरुक किया और कहा, मूर्ति निर्माण में हानिकारक रसायनिक सामग्री, पीओपी, जहरीले मरकरी, कैडमियम, जिंक, लैड, अल्यूमीनियम आदि भारी धातुओं के रसायनिक रंगों से मूर्तियों को न बनाएं। मूर्तियों को सादा मिट्टी व हर्बल रंगों से बनाया जाए। मूर्ति भी ३ से ५ फीट या आदम कद से छोटी बनाई जाए। पीओपी की मूर्ति की अपेक्षा सादा मिट्टी की मूर्ति बनाने में आर्थिक रुप से अधिक मुनाफा है और इससे जल, थल व हवा को साफ सुथरा रखने में सहयोग मिलता है।

कई मूर्तिकारों द्वारा छोटी मूर्तियों का निर्माण अधिक किया जा रहा है। गुना शहर में स्टेशन रोड, बडा पुल आदि स्थानों पर बन रही मूर्तियों के केंद्रों पर जाकर लोगों को जागरुक किया। उधर, कई मूर्तिकारों ने पीओपी का उपयोग पूर्ण रुप से बंद कर दिया और कुछ मूर्ति कार धीरे-धीरे पीओपी का उपयोग बंद कर रहे हैं। दरअसल, जहरीले पीओपी रसायनयुक्त मूर्तियां न बनाएं और जंगल संरक्षण के लिए कम से कम लकड़ी का उपयोग करें। पर्यावरण अनुकूल धार्मिक महोत्सव मनाकर असंतुलित होती पर्यावरणीय आपदाओं को रोका जा सकता है। गुना में ही सिंगवासा तालाब समेत सिंध और पार्वती नदी में वर्षों पुराने मूर्तियों के अवशेष मिलते हैं।

गुना शहर में बन रही हैं १००० मूर्तियां
गुना शहर में सादा मिट्टी की अनुमानित 1000, रुठियाई व राघौगढ़ में करीब 500 छोटी-बडी मूर्तियों का निर्माण किए जाने का अनुमान है। बडी मूर्ति में करीब 25-60 किलो लकडी व बांस का उपयोग ककया जाता है, जिसे पूण रुप से तैयार होने पर वजन करीब 100 से 150 किलो हो जाता है। गुना जिले में पीओपी की अपेक्षा पर्यावरण अनुकूल सादा मिट्टी की मूर्तियों की निर्माण सबसे अधिक होता है। मूर्तिकार ओम प्रकाश प्रजापति, लक्ष्मीनरायण प्रजापति, अनिलकुमार, गोपाल प्रजापति, माखनलाल प्रजापति, विष्णुपाल, सोमनाथ आदि को लेख व पत्र देकर जागरुक किया गया।