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पानीपत शौर्य यात्रा : मराठा सैनिकों के युद्ध कौशल का जीवंत प्रदर्शन

Marathas Gallantry - 11 को गुना आएगी पानीपत शौर्य यात्रा Panipat War- सात जनवरी को कोल्हापुर से रवाना होगी यात्रा, इतिहास से कराएंगे चिर-परिचित

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गुना

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Deepesh Tiwari

Jan 08, 2020

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गुना@प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट...

1761 में हुए पानीपत के युद्ध Panipat War से नई पीढ़ी को चिर-परिचित कराने के उद्देश्य से पहली बार कोल्हापुर महाराष्ट्र से पानीपत तक की शौर्य यात्रा gallantry journey 07 जनवरी को शुरू होगी, जो 14 जनवरी को पानीपत पहुंचेंगी।

यह यात्रा 11 जनवरी को सायं चार बजे देवास से गुना guna में प्रवेश करेगी, यहां उसी दिन मराठा सैनिकों Maratha soldiers के युद्ध कौशल Combat skills का जीवंत प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके बाद यह यात्रा पानीपत पहुंचेंगी। यह जानकारी पानीपत यात्रा से जुड़़े कोल्हापुर महाराष्ट्र के अश्विनी शिंदे ने गुना में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए दी।

शिंदे व सातारा महाराष्ट्र के आकाश मोरे ने बताया कि 14 जनवरी के दिन पानीपत में रणसंग्राम हुआ था, जिसमें कई लोगों की जानें गई थी। 14 जनवरी को तभी से पानीपत शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। महाराष्ट्र व देश के अन्य प्रदेश से अनेक इतिहास प्रेमी 14 जनवरी को प्रतिवर्ष पानीपत के पराक्रम तीर्थ पहुंचते हैं।

उन्होंने बताया कि पानीपत मराठां की वीरता का देश प्रेम की भावना का ज्वलंत इतिहास है। यह इतिहास जागृत हो,नई पीढ़ी को इस सत्य इतिहास का ज्ञान हो, इस पवित्र उद्देश्य से कोल्हापुर महाराष्ट्र से पानीपत- यह शौर्य यात्रा संकल्पित है।कोल्हापुर के इतिहास प्रेमियों ने यह अनूठा कार्यक्रम उपक्रम आरंभ किया है।

इस यात्रा के संयोजक उदय मोरे ने बताया कि 14 जनवरी को 2०2० पानीपत में आयोजित अद्वितीय कार्यक्रम में सहभागी होकर देश के इतिहास के कुछ पृष्ठ जानकर यह यात्रा कोल्हापुर महाराष्ट्र लौटेगी।

7 से 14 जनवरी 2०2० शौर्य तीर्थ के दर्शन तथा लौटने में जयपुर, उदयपुर, बड़ौदा, एवं मुंबई इस मार्ग से सहभागी 19 जनवरी को कोल्हापुर पहुंचेंगे। यात्रा संयोजक माने ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज के काल के मर्दाने खेलों का प्रदर्शन करेंगे। मराठा सैनिकों के युद्ध कौशल का जीवंत प्रदर्शन करेंगे।

अश्विनी शिंदे का कहना था कि यह यात्रा किसी एक समाज की नहीं बल्कि हर समाज का व्यक्ति इस यात्रा में जुड़ सकता है। जब उनसे पूछा गया कि इसकी प्रेरणा कहां से मिली, उन्होंने कहा कि पानीपत की फिल्म देखने के बाद लगा कि पानीपत तक की यात्रा करनी चाहिए।

इसके लिए वे अपने मित्रों के साथ वहां से निकलेंगे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पानीपत की यात्रा का बहुत कम ज्ञान है, ऐसी यात्राओं से नई पीढ़ी को नई-नई जानकारी मिलेगी। चर्चा के समय मौके पर उत्तम फराफटे, इन्द्रजीत नागेशकर आदि शामिल थे।