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mp election 2023: डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा-कांग्रेस, रुठे नेताओं को मनाने सीनियर नेता उतरे

विधानसभा चुनाव: टिकट बदलने की मांग तेज, रूठों को मनाने का काम वरिष्ठ नेताओं को सौंपा

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गुना

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Manish Geete

Oct 23, 2023

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विधानसभा चुनाव के टिकट की घोषणा के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के उम्मीदवारों को अपनों का ही डर सताने लगा है। दरअसल, कुछ उम्मीदवारों को लेकर उनकी ही पार्टी के नाराज नेता अपने समर्थकों के साथ खुलकर विरोध कर रहे हैं। इससे दोनों दलों के उम्मीदवारों को भितरघात का डर सताने लगा है। इन हालातों से निपटने के लिए उम्मीदवारों और संगठनों के पदाधिकारियों ने डैमेज कंट्रोल की तैयारी कर ली है। नाराज नेताओं को मनाने का जिम्मा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंपा गया है।

जिले में टिकट वितरण के बाद स्थानीय स्तर पर दोनों दलों में बवाल मचा हुआ है। खुद को या अपने नजदीकी को टिकट न मिलने से खफा कार्यकर्ता वरिष्ठ नेताओं के समक्ष और पार्टी कार्यालयों पर हंगामा कर रहे हैं। ऐसे ही कांग्रेस के दो असंतुष्ट दावेदारों को वरिष्ठ नेताओं ने भोपाल बुलाया है। वहीं भाजपा के लोगों ने बमौरी में टिकट न मिलने पर अपनी नाराजगी से वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराया है। जितना भितरघात का डर भाजपा प्रत्याशियों को है उतना ही कांग्रेस के प्रत्याशियों को भी है। वैसे अभी गुना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ है, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध हर स्तर पर उनके विरोधियों द्वारा किया जा रहा है।

बमौरी विधानसभा

क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी महेंद्र सिंह सिसौदिया को घोषित कर दिया है, जबकि इस विधानसभा क्षेत्र से दावेदार के रूप में महेंद्र सिंह किरार, इंजीनियर ओएन शर्मा, संतोष धाकड़, अरविंद धाकड़, राजेंद्र सिंह सलूजा, गिर्राज भार्गव, अरुण चतुर्वेदी जैसे कई नेताओं के नाम चर्चाओं में चल रहे थे। इनमें सिसौदिया सब पर भारी पड़े। सिसौदिया को टिकट मिलने के बाद मूल भाजपा के नेताओं और दावेदारों के साथ-साथ उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है। सिसौदिया के टिकट मिलते ही दूसरे खेमे के नेता भी सक्रिय हो गए हैं। इस नाराजगी को दूर करने और रूठों को मनाने के लिए भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। उन नेताओं ने इस दिशा में प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। क्षेत्र में टिकट से वंचित रहे एक समाज के लोगों ने भी पार्टी के दिग्गजों से मिलकर अपना हक मांगा है। यही हाल कांग्रेस में है। अग्रवाल से क्षेत्र के पुराने कांग्रेसी नाखुश हैं। उनका कहना है कि बरसों से पार्टी के लिए काम कर रहे नेताओं की उपेक्षा की गई है।

गुना विधानसभा
गुना में भी टिकट को लेकर सिंधिया भाजपा और मूल भाजपा के बीच आपसी खींचतान चल रही है। मूल भाजपा की ओर से पन्नालाल शाक्य, गोपीलाल जाटव और सिंधिया भाजपा की ओर से नीरज निगम, वीरेंद्र अहिरवार जैसे नेताओं के नाम टिकट के लिए चलाए जा रहे हैं। इसी खींचतान के चलते अभी तक इस सीट से किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि यहां से टिकट किसी को भी मिले, भितरघात होना तो तय है। कांग्रेस ने इस सीट से पंकज कनेरिया को टिकट दिया है, जिसका विरोध हरिओम खटीक, अशोक पालिया जैसे दावेदार खुलकर कर रहे हैं। इन दावेदारों ने हाल ही में गुना में कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह के समक्ष काफी विरोध किया था। उन्होंने कनेरिया को बाहरी होने के साथ-साथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष मेहरबान सिंह धाकड़ का ड्रायवर और खाना बनाने वाला तक बता दिया। हरिओम खटीक समेत अन्य नेताओं को भोपाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तलब किया है।

चांचौड़ा विधानसभा
चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र में टिकट की घोषणा के बाद भाजपा में मचे बवाल के बाद दावेदार ममता मीणा ने तो पार्टी ही छोड़ दी। अब वे आप से मैदान में हैं। इससे भाजपा उम्मीदवार 33 वर्षीय प्रियंका मीना के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। भाजपा को अभी भी यहां सबसे ज्यादा भितरघात का डर सता रहा है। इसी तरह कांग्रेस नेता बल्लू चौहान ने भी लक्ष्मण सिंह को टिकट मिलने के बाद उनके खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। इसके साथ ही दूसरे कांग्रेस के नेता भी भितरघात करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।

राघौगढ़ विधानसभा
राघौगढ़ क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी जयवर्धन सिंह के मुकाबले में भाजपा ने हीरेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। यहां से कई दूसरे भाजपा नेताओं के नाम भी दावेदारों के रूप में चल रहे थे। हीरेंद्र को केंद्रीय मंत्री सिंधिया का समर्थक माना जाता है। यहां भी टिकट मिलने के बाद मूल भाजपा और सिंधिया समर्थक भाजपा नेताओं के बीच रार बढ़ गई है। मूल भाजपा के नाराज नेताओं को मनाने के लिए वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं। यहां कांग्रेस में भितरघात की संभावना कम है।